
श्रीमद् भागवत कथा मोक्ष प्राप्ति का साधन”” बिलासपुर /वॉच ब्यूरो – ग्राम देवरी कला में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण समाप्ति का अंतिम दिवस कथा वाचक पंडित शिवचरित् द्विवेदी जी ने कहा कि एक बार राजा परीक्षित आखेट करते हुए वनों में बहुत दूर चले गए जब उनको प्यास लगी तो ऋषि के आश्रम में पहुंच गए और बोले ऋषिवर मुझे पानी पिला दो लेकिन ऋषि अपने तप में लीन थे परीक्षित ने सोचा कि इसने मेरा अपमान किया है इस पर राजा परीक्षित ने वहीं पर पड़े हुए मरा हुआ सर्प को ऋषि के गले में डाल दिया इस बात को ऋषि के बेटे श्रृंगी को जब जानकारी हुई तो उन्होंने जल लेकर मंत्रोच्चारण करते हुए जिसने पिता के गले में मरा हुआ सर्प डाला है आज से सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उसकी मौत हो जाएगी l ऋषि को जब पता चला तो उन्होंने अपने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो धर्मात्मा राजा परीक्षित है और यह अपराध इन्होंने कलयुग के वशीभूत होकर किया है l यह सूचना परीक्षित को दी कि वह आज से सातवें दिन तक्षक नाग तुम्हें डसेगा यह सुनकर परीक्षित दुखी नहीं हुए l राजा परीक्षित ने सुखदेव के पास गए और जीवन के उद्धार का मार्ग पूछा तब सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को श्रीमद् भागवत कथा सुनाई सातवें दिन परीक्षित को श्रृंगी ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग ने डस लिया और उनके जीवन का अंत हो गया भागवत कथा सुनने के प्रभाव से उसे मोक्ष प्राप्त हुआ l इस प्रकार भागवत कथा सुनने से मनुष्य को धर्म, अर्थ , काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है सत्य और असत्य का बोध होता है l इसलिए लोगों को श्रद्धा से कथा का श्रवण करना चाहिए l इस मौके पर ललित पाठक, उमाशंकर तिवारी , राजेंद्र तिवारी महेश तिवारी, बहोरीक शर्मा सुरेश, राजकुमार ,बसंत कुमार , विनोद कौशिक ,सोहन लाल वस्त्रकार, परदेसी राम अशोक वस्त्रकार ,अजय कुमार बिल्लू वस्त्रकार , कालिका प्रदीप ,प्रमोद , गेंद राम, छेदी लाल यादव ,दिलहरण मनोरमा ,ललिता ,आयुषी सावित्री,त्रिवेणी ,कृष्णा , अहिल्या सहित समस्त ग्राम वासी कथा का श्रवण किया l
