चाणक्य के अनुसार असफलता से भी सफलता का ताला खोला जा सकता है. चाणक्य ने अपनी नीतियों में कुछ ऐसी बातों का जिक्र किया है जिससे असफलता मिलने के बाद भी कुछ गुण सीखे जा सकते हैं. आइए जानते हैं क्या है वह बातें.
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को हार के डर से कभी भी अपना फैसला नहीं बदलना चाहिए. जो ऐसा करते हैं वह कभी कामयाब नहीं हो पाते और उनकी सफलता में हमेशा अड़चनें भी आती हैं. हमेशा खुद के निर्णय और अपने आत्मविश्वास को बनाए रखना चाहिए.
चाणक्य के अनुसार निरंतर प्रयास और कोशिश करना ही सफलता का एकमात्र मंत्र माना जाता है. जब तक व्यक्ति को सफलता ना मिल जाए उसे प्रयास करते रहना चाहिए. जिनमें मेहनत करने की शक्ति नहीं होती उन्हें सफलता कभी प्राप्त नहीं होती.
अधिकतर व्यक्ति जो सफल हो जाता है उसे समाज में आलोचनाएं झेलनी पड़ती है, जो उनके मन को व्यथित कर देती है. चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को इन आलोचनाओं को एक कान से सुनना चाहिए और दूसरे से निकाल देना चाहिए. इससे आप जीवन में सदा तरक्की करते रहे
माना जाता है कि सफलता के लिए ऐसा कोई भी रास्ता नहीं है जो अड़चनों से होकर ना गुजरता हो. यदि आप किसी प्रयास में विफल हो जाते हैं और दोबारा कोशिश नहीं करते हैं तो आप कभी कामयाब नहीं हो सकते. दरअसल, असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी मानी जाती है
चाणक्य के अनुसार यदि आपको सफलता नहीं मिलती है तो आप निराश होकर अपने लक्ष्य को ना छोड़े बल्कि उसका अवलोकन करके दोबारा प्रयास करें. चाणक्य का मानना था कि जिस व्यक्ति को लक्ष्य आसानी से प्राप्त हो जाते हैं वे विफल भी बहुत जल्दी हो जाते हैं. संभव है कि अन्य लोगों के मुकाबले आपको अधिक मेहनत करनी पड़ें लेकिन जो हार नहीं मानते उन्हें सफलता जरूर मिलती है.

