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AIIMS Raipur में सुरक्षागार्ड की गुंडागर्दी, मरीज के परिजन से की बदसलूकी 

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रायपुर। राजधानी रायपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल AIIMS रायपुर में मरीजों के परिजनों के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अस्पताल परिसर के अंदर स्थित कैंटीन में प्रवेश को लेकर सुरक्षा गार्ड और एक मरीज के परिजन के बीच विवाद होता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, कैंटीन में जाने के लिए परिजन से पास दिखाने को कहा गया। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात SIS कंपनी के सुरक्षागार्ड आर.के. राठौर ने कथित तौर पर परिजन के साथ असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया। वीडियो में गार्ड का व्यवहार तीखा और अनुचित बताया जा रहा है, जिससे मौके पर मौजूद अन्य लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली।

घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहले से ही इलाज को लेकर काफी परेशानियां रहती हैं, ऊपर से इस तरह का व्यवहार स्थिति को और कठिन बना देता है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था तो सख्त है, लेकिन उसमें संवेदनशीलता की कमी नजर आती है। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका आरोप है कि अस्पताल में अक्सर सुरक्षाकर्मियों और स्टाफ का रवैया कठोर रहता है, जिससे मरीजों के साथ आए परिजनों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

AIIMS जैसे बड़े केंद्रीय संस्थान से आम लोगों को बेहतर व्यवहार और सुविधा की उम्मीद रहती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं संस्थान की छवि को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ मानवीय व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

माना जा रहा है कि वीडियो के वायरल होने के बाद आंतरिक जांच की जा सकती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था के साथ-साथ व्यवहार सुधारने की दिशा में भी गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों को सुविधा के साथ सम्मानजनक व्यवहार मिलना भी उतना ही जरूरी है, जितना इलाज।

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