नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना और हस्तक्षेप करना अच्छी स्थिति नहीं है। अदालत ने यह भी पूछा कि ऐसे असामान्य हालात में केंद्रीय एजेंसी के पास क्या कोई उपाय नहीं होना चाहिए।
यह मामला उस समय का है जब ED ने चुनाव से पहले I-PAC के दफ्तरों पर छापा मारा था। इस दौरान ममता बनर्जी भी वहां पहुंच गई थीं। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मुख्यमंत्री का इस तरह हस्तक्षेप करना सत्ता का गंभीर दुरुपयोग है।
ED ने क्या आरोप लगाए?
ED के अनुसार, ममता बनर्जी छापेमारी के दौरान चुनाव रणनीतिकार कंपनी I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पहुंचीं। एजेंसी का आरोप है कि वह वहां से एक लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज अपने साथ ले गईं। ED ने इसे जांच में बाधा डालने वाला कदम बताया और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
ममता बनर्जी का जवाब
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यह छापेमारी राजनीतिक रूप से प्रेरित थी और इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव से पहले दबाव बनाने के लिए करवाया। उनका कहना है कि ED का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद से किया जा रहा है। ईडी ने ममता बनर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कोयला घोटाला मामले से जुड़ी थी और पूरी तरह सबूतों के आधार पर की गई थी। ईडी ने साफ किया कि यह किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि जांच के तहत की गई कार्रवाई थी।

