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चाय पर चर्चा: 2 साल में बदलती कवर्धा की तस्वीर, हर चौक-चौराहे पर विजय शर्मा की चर्चा

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कवर्धा:  शहर से लेकर गांव की चाय दुकानों तक इन दिनों एक ही चर्चा जोरों पर है कि पिछले दो वर्षों में जिले में जिस रफ्तार से विकास कार्य हुए हैं, वैसा नजारा लोगों ने वर्षों में नहीं देखा। लोग खुले तौर पर कहते नजर आते हैं कि जब से कवर्धा को विधायक और प्रदेश को उपमुख्यमंत्री के रूप में विजय शर्मा मिले हैं, तब से जिले में विकास की गाड़ी तेज रफ्तार से दौड़ने लगी है।

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि प्रदेश में कभी डॉ रमन सिंह की 15 साल की सरकार रही और उसके बाद कांग्रेस की सरकारकी 5 साल सरकार रही, लेकिन उस दौर में कवर्धा जिले में जिस स्तर का बुनियादी विकास होना चाहिए था, वह आम जनता को नजर नहीं आया।

लेकिन पिछले दो वर्षों में स्थिति तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। सबसे ज्यादा चर्चा भोरमदेव मंदिर को केंद्र में रखकर प्रस्तावित भोरमदेव कॉरिडोर योजना की हो रही है, जिसे पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

इसी तरह वर्षों से लंबित कवर्धा बाईपास सड़क को लेकर भी अब ठोस पहल शुरू होती दिखाई दे रही है। शहर के लोग कहते हैं कि कांग्रेस सरकार के पांच साल में भी बाईपास की बात तो खूब हुई, लेकिन काम जमीन पर नहीं उतर पाया। अब इस दिशा में बढ़ती हलचल लोगों में नई उम्मीद जगा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास की तस्वीर साफ नजर आने लगी है प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण कार्य को लेकर गांव के लोग संतोष जताते नजर आते हैं। कई गांवों तक पक्की सड़कें पहुंचने से ग्रामीणों का आवागमन पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

इसके साथ ही सिमगा से चिल्फी तक फोरलेन सड़क की स्वीकृति को भी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। लोगों का मानना है कि यह सड़क आने वाले समय में कवर्धा को प्रदेश के प्रमुख मार्गों से बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेगी।

शहर में भी विकास की रफ्तार साफ दिखाई देती है। चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, नए गार्डन का निर्माण, जगह-जगह भगवान हनुमान, छत्रपति शिवाजी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमाओं की स्थापना जैसे कार्यों ने शहर की पहचान को नई दिशा दी है। रात के समय रोशनी से जगमगाते चौक-चौराहे कवर्धा की बदली हुई तस्वीर खुद बयान करते हैं।

इसी बीच प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी एक बड़ी चर्चा चाय की टेबलों तक पहुंच रही है। देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जो संकल्प लिया था कि वर्ष 2026 तक बस्तर सहित छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को जड़ से समाप्त किया जाएगा, उस संकल्प को जमीन पर उतारने के अभियान में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की भूमिका को भी लोग गंभीरता से देख रहे हैं।

चर्चा यह भी है कि सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और सरकार की सख्त नीति के चलते नक्सल गतिविधियों पर पहले की तुलना में काफी हद तक नियंत्रण देखने को मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि वर्ष 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का समूल खात्मा होता है, तो यह उपलब्धि प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

लोग यह भी कहते सुनाई देते हैं कि अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो इतिहास में यह जरूर लिखा जाएगा कि जिस दौर में विजय शर्मा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहे, उसी दौर में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई अपने अंतिम चरण तक पहुंची।

हालांकि जिले में हो रहे इन विकास कार्यों और बदलती तस्वीर के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी कम नहीं है। विपक्ष के कुछ नेता किसी भी घटना को लेकर सीधे विजय शर्मा पर आरोप लगाने से पीछे नहीं हटते। लेकिन समर्थकों का कहना है कि तेजी से हो रहे विकास कार्यों को देखकर विपक्ष बेचैन है और विकास की चर्चा को दबाने के लिए लगातार बयानबाजी कर रहा है।

अब चाय की दुकानों पर बैठे लोग मुस्कुराते हुए एक ही बात कहते नजर आते हैं—

“राजनीति अपनी जगह है, लेकिन अगर विकास और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में कवर्धा ही नहीं बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ नई पहचान के साथ सामने आएगा।”

पत्रकार दीपक तिवारी

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