NCERT Book Controversy : नई दिल्ली। NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। यह किताब हाल ही में जारी की गई थी, लेकिन ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का जिक्र होने के बाद इसे वापस ले लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि किताब विशेषज्ञों के एक पैनल ने तैयार की थी, जिसमें एक वकील भी शामिल था। हालांकि, किताब को अलग से कानूनी विशेषज्ञों से जांच करवाना अनिवार्य नहीं होता।
यह विवाद ‘द रोल ऑफ द ज्यूडिशियरी इन आवर सोसाइटी’ नाम के अध्याय को लेकर हुआ। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि न्यायपालिका से जुड़े अध्याय की कानूनी समीक्षा क्यों नहीं कराई गई। इस पर एक अधिकारी ने कहा कि पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया में ऐसी कोई अनिवार्य व्यवस्था नहीं है।
यह किताब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 24 फरवरी को जारी की थी। इसे 2023 से 2025 के बीच तैयार किया गया और 2026 में लागू किया गया। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा 2023 के तहत किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
मामला बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि न्यायपालिका की छवि खराब करने की साजिश रची गई है। अदालत ने पूरी किताब पर रोक लगा दी और सभी छपी व डिजिटल प्रतियां जब्त करने का आदेश दिया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस पर नाराजगी जताई और कहा कि जिम्मेदारी तय की जाएगी। NCERT ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और किताब का वितरण रोक दिया। एक अधिकारी ने माना कि किताब में अनुचित सामग्री शामिल हो गई थी, जो निर्णय में गलती थी। सूत्रों के अनुसार, NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी इस मामले की जांच कर रहे हैं कि यह सामग्री किताब में कैसे शामिल हुई और जिम्मेदार कौन है?
अध्याय में क्या लिखा था?
विवाद उस हिस्से को लेकर है जिसमें न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे भ्रष्टाचार और लंबित मामलों का जिक्र किया गया था। अध्याय में बताया गया था कि सरकार तीन मुख्य भूमिकाएं निभाती हैरक्षक (कानून और रक्षा), प्रदाता (कल्याण और विकास) और नियामक (आर्थिक गतिविधियां और सामाजिक न्याय)।
इसके बाद छात्रों से सवाल पूछा गया था कि अगर ये संस्थाएं जनता की सेवा के लिए हैं, तो ‘भ्रष्टाचार की खबरें क्यों सुनाई देती हैं?’ किताब में यह भी बताया गया था कि सरकार में शिकायत निवारण के लिए विभाग, सतर्कता आयोग और अन्य व्यवस्थाएं हैं, जहां भ्रष्टाचार की शिकायत की जा सकती है।
अधिकारियों ने बताया कि 2024 तक इस्तेमाल होने वाली पुरानी कक्षा 8 की किताब में भ्रष्टाचार का जिक्र नहीं था। हालांकि, नई कक्षा 7 और 8 की किताबों में भ्रष्टाचार पर चर्चा की गई है। कक्षा 7 की किताब में चुनाव और विधायिका में भ्रष्टाचार का जिक्र है, लेकिन न्यायपालिका का नहीं।
किताब तैयार करने की प्रक्रिया
NCERT के अनुसार, किताबें कई स्तर की जांच और समीक्षा के बाद तैयार होती हैं। हर विषय के लिए एक करिकुलर एरिया ग्रुप (CAG) बनाया जाता है, जो विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर मसौदा तैयार करता है। इसके बाद मसौदे की कई स्तरों पर समीक्षा होती है और अंत में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम व शिक्षण-सामग्री समिति (NSTC) से मंजूरी मिलती है।
अधिकारियों ने कहा कि किताबें कई विशेषज्ञ पढ़ते हैं और अंतिम रूप देने से पहले उनमें कई बदलाव होते हैं। यह सामग्री नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की गई थी, जिसमें छात्रों को जटिल सवालों और वास्तविक समस्याओं पर सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
फिलहाल शिक्षा मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय को पत्र लिखकर डिजिटल प्लेटफॉर्म से इस किताब को हटाने के लिए कहा है। एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय ने मामले को सुधारने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

