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AI + EI का संगम: रायपुर के श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल में शुरू हुई ‘मेटा विज़न एआई लैब

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रायपुर (छ.ग. वाॅच) । आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का है। तकनीक के इस तेज़ी से बदलते समय में मेडिकल साइंस भी नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है। अब बीमारियों की पहचान केवल लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि बहुत पहले और कहीं अधिक सटीक तरीके से संभव हो रही है। ऐसे समय में, जब देश-दुनिया में एआई को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है और दिल्ली में इंटरनेशनल एआई समिट जैसे मंचों पर इसके उपयोग पर मंथन हो रहा है, रायपुर स्थित श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल ने नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक अहम और दूरदर्शी पहल की है।

 

हॉस्पिटल परिसर में स्थापित मेटा विज़न एआई लैब (एडवांस्ड ऑक्यूलर इमेजिंग और डायग्नोस्टिक यूनिट) अब आँखों की जाँच और इलाज को एक नई दिशा दे रही है। यह लैब आँखों की संरचना को परत-दर-परत देखने और समझने में सक्षम है, जिससे कई गंभीर नेत्र रोगों की पहचान समय रहते की जा सकती है।

 

जापान, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में विकसित अत्याधुनिक नेत्र चिकित्सा तकनीक को अब रायपुर में भी उपलब्ध कराया गया है। विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाली इन विदेशी मशीनों को विशेष रूप से आँखों की सूक्ष्म जाँच और सटीक डायग्नोसिस के लिए डिज़ाइन किया गया है। इन्हीं एडवांस्ड सिस्टम्स के माध्यम से श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल ने नेत्र चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं को सेंट्रल इंडिया तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

जहाँ मशीन की समझ और डॉक्टर का अनुभव मिलते हैं

मेटा विज़न एआई लैब को केवल आधुनिक मशीनों की सुविधा कहना अधूरा होगा। यहाँ एआई की उन्नत तकनीक के साथ-साथ डॉक्टरों का वर्षों का अनुभव समान रूप से काम करता है। इस यूनिट से जुड़ी मेडिकल टीम देश के प्रतिष्ठित नेत्र संस्थानों से प्रशिक्षित है।

  • डॉ. चारुदत्त कलमकार (एम्स, नई दिल्ली)
  • डॉ. अनिल के. गुप्ता (शंकर नेत्रालय, चेन्नई)
  • डॉ. अमृता मुखर्जी (एल. वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, हैदराबाद)
  • डॉ. जयेश पाटिल (शंकर नेत्रालय, चेन्नई)
  • डॉ. शुभांक खरे (अरविंद नेत्रालय)
  • डॉ. रोहित राव (एल. वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, हैदराबाद)

 

यही कारण है कि यहाँ मशीनों से मिलने वाला डेटा केवल एक रिपोर्ट बनकर नहीं रह जाता, बल्कि अनुभवी डॉक्टरों की विशेषज्ञ समझ से जुड़कर इलाज की सही दिशा तय करता है।

ग्लूकोमा : ‘नेत्र चोर’ जो चुपचाप रोशनी चुरा लेता है

ग्लूकोमा को अक्सर “नेत्र चोर” कहा जाता है, क्योंकि यह बीमारी बिना दर्द और बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे आँखों की रोशनी चुरा लेती है। डॉ. चारुदत्त कलमकार के अनुसार, मेटा विज़न एआई लैब में उपलब्ध एआई आधारित पेंटाकैम और अन्य उन्नत तकनीकों की मदद से अब ग्लूकोमा को शुरुआती अवस्था में ही अत्यंत सटीकता के साथ पहचाना जा सकता है।

ऐसे मरीज जिनमें अभी कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, उनमें भी ग्लूकोमा के संकेत पहले ही पकड़ में आ जाते हैं। इससे समय रहते इलाज शुरू कर स्थायी दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी: बिना दर्द, बिना इंजेक्शन जाँच

भारत तेज़ी से डायबिटीज की राजधानी बनता जा रहा है। अनियंत्रित डायबिटीज का सीधा असर आँखों पर पड़ता है और डायबिटिक रेटिनोपैथी के कारण यदि रोशनी चली जाए, तो उसे वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है।

मेटा विज़न एआई लैब में उपलब्ध एआई आधारित ओसीटी एंजियोप्लेक्स तकनीक से रेटिना की रक्त वाहिकाओं में हो रही या भविष्य में होने वाली लीकेज का अनुमान पहले ही लगाया जा सकता है-वो भी बिना डाई, बिना इंजेक्शन और बिना किसी दर्दनाक प्रक्रिया के।

इस क्षेत्र में रेटिना विशेषज्ञ डॉ. जयेश पाटिल और डॉ. शुभांक खरे समय रहते स्थिति का आकलन कर ग्रीन लेज़र एवं अन्य उपचारों के माध्यम से मरीजों की दृष्टि को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कॉर्निया और केराटोकोनस की शुरुआती पहचान

अधिक चश्मे का नंबर रखने वाले मरीजों में केराटोकोनस होने की संभावना अधिक रहती है। मेटा विज़न एआई लैब में उपलब्ध एआई आधारित पेंटाकैम तकनीक से कॉर्निया की टोपोग्राफी और टोमोग्राफी द्वारा केराटोकोनस को बहुत प्रारंभिक अवस्था में ही पहचाना जा सकता है।

इस क्षेत्र में डॉ. अमृता मुखर्जी कॉर्निया से जुड़े जटिल रोगों और डेसैक सर्जरी जैसे उन्नत उपचारों में अपनी विशेषज्ञ सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।

 

कैटरैक्ट सर्जरी: मल्टीफोकल और टॉरिक लेंस से “कमांडो विज़न”

आज कैटरैक्ट सर्जरी केवल धुंधली रोशनी दूर करने तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक के साथ अब मरीज सर्जरी के बाद बिल्कुल सटीक, संतुलित और प्राकृतिक दृष्टि की अपेक्षा करते हैं।

 

श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल में डॉ. अनिल के. गुप्ता और डॉ. चारुदत्त कलमकार द्वारा मल्टीफोकल एवं टॉरिक लेंस का उपयोग कर कैटरैक्ट सर्जरी की जा रही है। इन उन्नत लेंसों के माध्यम से मरीजों को दूर, नज़दीक और इंटरमीडिएट तीनों दूरी पर स्पष्ट दृ‌ष्टि मिलती है।

 

इस तरह की दृष्टि को आम भाषा में मरीज और उनके परिजन “कमांडो विज़न” के रूप में अनुभव करते हैं- जहाँ रोज़मर्रा के कार्य, पढ़ना, मोबाइल देखना, गाड़ी चलाना और बाहरी गतिविधियाँ बिना चश्मे के संभव हो पाती हैं। सही लेंस का चयन और व्यक्तिगत आँखों की संरचना के अनुसार सर्जरी की योजना इसकी सफलता का आधार है, जिसमें मेटा विज़न एआई लैब की भूमिका निर्णायक रहती है।

 

ऑक्युलोप्लास्टी और आँसू नली की सर्जरी

 

डॉ. रोहित राव, ऑक्युलोप्लास्टी सर्जन, एआई आधारित एएस-ओसीटी की सहायता से आँसू नली (टीयर डक्ट), पलक और ऑक्युलोप्लास्टी से संबंधित जटिल समस्याओं का सटीक डायग्नोसिस और सफल उपचार कर रहे हैं। उन्नत इमेजिंग तकनीक से बीमारी की जड़ तक पहुँचकर उपचार किया जाता है, जिससे सर्जरी अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनती है।

 

सेंट्रल इंडिया के लिए एक मील का पत्थर

 

यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि मेटा विज़न एआई लैब की सेवाओं का लाभ अब केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज यहाँ उपचार के लिए पहुँच रहे हैं।

 

श गणेश विनायक आई हॉस्पिटल को पूरा विश्वास है कि मेटा विज़न एआई लैब आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और सेंट्रल इंडिया में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक स्थायी और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी- जहाँ तकनीक और अनुभव मिलकर मरीजों को बेहतर दृष्टि और बेहतर जीवन देने का काम करेंगे।

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