कवर्धा: कबीरधाम जिला में आपातकालीन 112 सेवा की हालत इन दिनों चिंताजनक बनी हुई है। जिले में तैनात 112 की अधिकांश गाड़ियां लंबे समय से खराब पड़ी हैं, जिसके चलते आपात स्थिति में डायल करने पर भी समय पर मदद नहीं मिल पा रही है। नतीजा—जनता की परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, टेंडर बदलने के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। पहले जिस एजेंसी के पास टेंडर था, अब वह दूसरे के पास चला गया है। इस अदला-बदली के बीच पुरानी गाड़ियों की मरम्मत ठप हो गई है और नई गाड़ियों की आपूर्ति भी अटकी हुई है। मरम्मत के अभाव में कई वाहन गैराज में धूल फांक रहे हैं, जबकि सड़क पर जनता मदद के लिए तरस रही है।
ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्र तक, दुर्घटना, झगड़ा, स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थितियों में 112 की देरी आम बात हो गई है। कई मामलों में कॉल के बाद भी वाहन नहीं पहुंच पाता, तो कहीं घंटों इंतजार करना पड़ता है। सवाल यह है कि आपात सेवा अगर आपात में ही फेल हो जाए, तो आम नागरिक किसके भरोसे रहे?
सबसे हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई या वैकल्पिक व्यवस्था नजर नहीं आ रही। न मरम्मत की रफ्तार तेज है, न ही अस्थायी तौर पर अतिरिक्त वाहन लगाए गए हैं। कागजी फाइलों और टेंडर प्रक्रियाओं के बीच जन-सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।
जनता का सीधा सवाल है—
जब 112 जैसी जीवनरक्षक सेवा ही लाचार हो जाए, तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या प्रशासन जागेगा, या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही हरकत में आएगा?
पत्रकार दीपक तिवारी
