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ट्रंप से मिलीं मारिया कोरिना मचाडो, सौंपा अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल

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Nobel Peace Prize: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात की। यह मुलाकात मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा अगवा किए जाने के बाद ट्रंप की किसी वेनेजुएलाई नेता से पहली आमने-सामने की बैठक थी। मुलाकात के दौरान मचाडो ने ट्रंप को अपना 2025 नोबेल शांति पुरस्कार का स्वर्ण मेडल भेंट कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल सौंपा है। यह वेनेजुएला के लोगों की आजादी के लिए उनके अनोखे समर्थन की पहचान है।’

मचाडो ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और 200 साल पुरानी घटना का जिक्र किया।उन्होंने कहा ‘200 साल पहले मार्क्विस डे लाफायेट ने जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर वाला मेडल साइमन बोलिवर को दिया था। अब बोलिवर के लोगों ने वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी (ट्रंप) को नोबेल मेडल लौटाया है।’ यह दोनों देशों के बीच स्वतंत्रता की लड़ाई में भाईचारे का प्रतीक है।

ट्रंप ने इस घटना पर अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा ‘मारिया एक अद्भुत महिला हैं जिन्होंने बहुत कुछ सहा है। मारिया ने मेरे अच्छे कामों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया। हमारे बीच का यह आपसी सम्मान कमाल का है। धन्यवाद मारिया!’ इण्डिया टुडे के रिपोर्ट के मुताबिक़ व्हाइट हाउस के अधिकारी ने पुष्टि की कि ट्रंप ने मेडल रख लिया है।

नोबेल कमिटी का स्पष्ट रुखनॉर्वेजियन नोबेल इंस्टीट्यूट ने पहले ही बता दिया था कि नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद इसे रद्द, साझा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। हालांकि, संस्थान ने बाद में स्पष्ट किया कि भौतिक मेडल (सोने का पदक) मालिक बदल सकता है, क्योंकि यह व्यक्तिगत संपत्ति है, लेकिन नोबेल विजेता की उपाधि कभी नहीं बदल सकती। मचाडो हमेशा ‘नोबेल शांति पुरस्कार विजेता’ ही कहलाएंगी।

मुलाकात में वेनेजुएला के भविष्य पर चर्चा हुई, लेकिन नए चुनावों की कोई समयसीमा तय नहीं हुई। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने कहा कि इस पर कोई बात नहीं हुई। उन्होंने मचाडो को ‘बहादुर और उल्लेखनीय आवाज’ बताया लेकिन ट्रंप अभी भी डेल्सी रोड्रिग्ज को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में समर्थन दे रहे हैं।ट्रंप ने पहले मचाडो की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए थे और कहा था कि उनके पास पर्याप्त समर्थन नहीं है।मुलाकात के बाद मचाडो बाहर निकलीं और समर्थकों से मिलीं। उन्होंने स्पेनिश में कहा, ‘हम राष्ट्रपति ट्रंप पर भरोसा कर सकते हैं।’ उनके हाथ में विपक्षी नेता का पोस्टर था।

मारिया कोरिना मचाडो को अक्टूबर 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, वेनेजुएला में लोकतंत्र और तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए। 2024 के चुनाव में उन्हें उम्मीदवारी से रोका गया था लेकिन विपक्ष को जीत मिली थी। मादुरो की गिरफ्तारी (3 जनवरी 2026) के बाद मचाडो को कई लोग राष्ट्रपति के रूप में देख रहे थे लेकिन ट्रंप ने ऐसा नहीं किया।

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