बिलासपुर वॉच

भूख से तड़पकर 3 दिनों में 30 से अधिक गायों की मौत, श्री वासुदेव गौशाला में हाहाकार

Share this
भूख से तड़पकर 3 दिनों में 30 से अधिक गायों की मौत, श्री वासुदेव गौशाला में हाहाकार

गायों के शव गुपचुप दफनाने का खुलासा, जांच और कार्रवाई की मांग

बिलासपुर/पचपेड़ी। श्री वासुदेव गौशाला सेवा समिति, ग्राम ओखर (पचपेड़ी) में पिछले तीन दिनों के भीतर 30 से अधिक गायों की मौत हो जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। भूख से तड़पकर गायों की मौत की घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने गौशाला प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए समिति को भंग करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में लंबे समय से चारे की कमी है। 24 अगस्त को एक ही दिन में लगभग 30 गायों की मौत हो गई। गायों के शवों को गुपचुप तरीके से जमीन में दफनाया जा रहा था, लेकिन मामला सामने आने पर ग्रामीणों ने विरोध जताया।

ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने कहा कि अगर चारे की समुचित व्यवस्था नहीं की गई या समिति पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। “अबकी बार सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे, चाहे इसके लिए उग्र आंदोलन ही क्यों न करना पड़े।” – ग्रामीण।

गौशाला प्रबंधन का बचाव

गौशाला समिति के सदस्य रामबिलास पटेल का कहना है कि चरवाहा शराब के नशे में धुत्त होकर गायों को खुला छोड़ देता था, जिससे फसलें बर्बाद हुईं और ग्रामीण नाराज़ हो गए। वहीं समिति का दावा है कि अनुदान न मिलने की वजह से पूरा खर्च निजी तौर पर उठाया जा रहा है, लेकिन बरसात और चारा की कमी के कारण दिक्कतें बढ़ीं।

ग्रामीणों का आरोप – पहले गांव में फेंकते थे गाय की लाश

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले मृत गायों को गांव में फेंक दिया जाता था, जिससे बदबू और विवाद होता था। विरोध के बाद प्रबंधन ने जेसीबी से गड्ढे खोदकर शवों को दफनाना शुरू किया।

विधायक दिलीप लहरिया का बयान

“यह गंभीर मामला है। इतनी बड़ी लापरवाही से गायों की मौत हुई है। असल में यह हत्या के समान है। मैं स्वयं कलेक्टर से मिलकर इस गौशाला को निरस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करूंगा।” – दिलीप लहरिया, विधायक मस्तूरी।

तहसीलदार की प्रतिक्रिया

तहसीलदार प्रकाश साहू ने कहा – “लगातार मौत की शिकायत मिली है। मृत गायों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और विस्तृत जांच शुरू होगी।”

ग्रामीण का कथन

“तीन महीने में 100 से अधिक गायें मर चुकी हैं। प्रबंधन की लापरवाही साफ है।” – लक्ष्मी यादव, सरपंच ओखर।

“24 अगस्त को 30 से ज्यादा और अगले दिन 12 गायों की मौत हुई। सब भूख से मरी हैं।” – चंद्रप्रकाश कौशिक, ग्रामीण।

“अगर जल्द चारा नहीं मिला या समिति भंग नहीं हुई तो कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।” – मन्नू यादव, ग्रामीण।

प्रबंधन का वर्जन

गौशाला प्रबंधन समिति के हेमंत पटेल का कहना है कि गौशाला की क्षमता 600 गायों की है और वर्तमान में करीब 450 गायें रखी गई हैं। इनमें अधिकांश एक्सीडेंटल और बाहर से लाई गई गायें हैं। “एक साल से बिना अनुदान के खुद खर्च उठाना पड़ रहा है। बरसात में चारा गीला हो जाता है, जिससे व्यवस्था बिगड़ी।”

 

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *