रायपुर। छत्तीसगढ़ में महीनों से लंबित मंत्रिमंडल विस्तार अब पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार की अनुमति मिलते ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल देखी जा रही थी। केंद्र से अनुमति मिलने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्यपाल रमेन डेका से मिलने राजभवन पहुंचे थे जिसके बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। खासकर भाजपा के विधायक लगातार कैबिनेट में अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत दिखाई दे रहे थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के राजभवन दौरे को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी कि बहुत ही जल्द नए मंत्रियों की घोषणा कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हरियाणा फॉर्मूला वाले बयान ने यह तो जाहिर कर ही दिया था कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार मंत्रिमंड़ल में 14 मंत्री हो सकते हैं। इसके साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार से संबंधित बड़ा सवाल ये भी खड़ा हो गया था कि विष्णुदेव साय की कैबिनेट में किन तीन नए चेहरों को शामिल किया जाएगा ? कई संभावित नाम सामने आ रहे थे लेकिन औपचारिक घोषणा के बाद भाजपा ने इन 3 नए विधायकों को मंत्री पद का दायित्व सौंपने का निर्णय लिया।
- गजेंद्र यादव, दुर्ग शहर विधायक
- गुरु खुशवंत साहेब, आरंग विधायक
- राजेश अग्रवाल, अंबिकापुर विधायक
गजेंद्र यादव, दुर्ग शहर विधायक
दुर्ग शहर विधायक गजेंद्र यादव नए मंत्री बनने की रेस में सबसे आगे तो थे ही, सरकार ने उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाने के साथ-साथ स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। हालांकि गजेंद्र यादव पहली बार के विधायक हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में RSS की नीव रखने वाले प्रमुख सदस्यों में से एक बिसरा राम यादव के सुपुत्र होने के चलते पार्टी में उनकी खासी बखत है। इसके अलावा यदि जातिगत समीकरण की बात की जाए तो गजेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ के मंत्रिमंडल में जगह देकर राज्य में OBC वर्ग के लोगों को साधने की कोशिश कारगर साबित हो सकती है।

साय मंत्रिमंडल में दुर्ग संभाग से सिर्फ 2 ही विधायकों को जगह मिली थी जो कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के 7 मंत्रियों की अपेक्षा बेहद कम थी। क्षेत्रीय सामंजस्य बनाए रखने के लिए दुर्ग संभाग से मंत्री बनाया जाना बहुत जरूरी था। यह भी एक बड़ा कारण बना जिसके चलते गजेंद्र यादव को मंत्रिमंडल में जगह दी गई।
गजेंद्र यादव को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की अटकलें कैबिनेट विस्तार के शुरुआती दौर से ही लगाई जा रही थी, लेकिन उनके नाम पर मुहर लगने का एक बड़ा कारण यह भी बना कि छत्तीसगढ़ भाजपा में यादव समाज का कोई भी बड़ा नेता नहीं है। साहू और कुर्मीग् समाज के बाद राज्य में यादव समाज के लोगों की ही सबसे ज्यादा आबादी है जिसके चलते आंकलन किया जा सकता है कि गजेंद्र यादव को मंत्रिमंडल में जगह क्यों दी गई है।
गुरु खुशवंत साहेब, आरंग विधायक
साय कैबिनेट में आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब को जगह दी गई है, उन्हें कौशल विकास समेत तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार और अनुसूचित जाति विकास विभाग की कमान सौंपी गई है। छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज के लोगों की संख्या बहुतायत में है और भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार की कैबिनेट में सतनामी समाज के किसी भी नेता को अब तक शामिल नहीं किया गया था। इसके अलावा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से गुरु खुशवंत साहेब की लगातार बढ़ती नजदीकियां मंत्रिमंडल में उनकी जगह पुख्ता होने की ओर इशारा कर ही रही थी।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में भी भूपेश बघेल ने शुरुआत से ही गुरु रूद्र कुमार को अपने मंत्रियों में शामिल किया था और राज्य में सरकार बदलते तक गुरु रूद्र कुमार राज्य में सतनामी समाज का प्रतिनिधित्व करते रहे लेकिन, राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद से अब तक सतनामी समाज से किसी बड़े नेता को मंत्री नहीं बनाया गया था जिसके चलते सतनामी समाज में विरोधाभास की स्थिति पैदा हो सकती थी इसलिए गुरु खुशवंत साहेब को कैबिनेट में जगह दिया जाना भाजपा के लिए सकारात्मक निर्णय रहा।
साय कैबिनेट में प्रदेश की राजधानी तो दूर पूरे संभाग से सिर्फ एक ही विधायक को जगह दी गई थी। जिसके चलते विशेषज्ञों का भी मानना था कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए रायपुर संभाग से एक मंत्री बनाया जाएगा। मंत्री बनने की रेस में गुरु खुशवंत कुमार को एक युवा चेहरे के रूप में देखा गया, नतीजन आज उन्होंने राज्य के मंत्री पद की शपथ ली।
राजेश अग्रवाल, अंबिकापुर विधायक
छ्त्तीसढ़ कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद की शपथ लेने वाले तीसरे मंत्री राजेश अग्रवाल अंबिकापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं, राज्य सरकार ने राजेश अग्रवाल को पर्यटन, धार्मिक न्यास, धर्मस्व विभाग संभालने की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव को कड़े मुकाबले में 94 मतों से हराकर चुनाव जीता था। अंबिकापुर विधानसभा सीट प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है। जहां से प्रदेश के प्रथम डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव विधायक थे। उनके खिलाफ राजेश अग्रवाल को चुनावी मैदान में उतारा गया था और चुनावी नतीजा राजेश अग्रवाल के पक्ष में आया था।

अंबिकापुर क्षेत्र से टीएस सिंहदेव को हराना ही अपने आप में बड़ी सफलता थी। इसके अलावा 2023 विधानसभा चुनाव में अंबिकापुर क्षेत्र में भाजपा ने कब्जा कर लिया था जिसका बड़ा श्रेय राजेश अग्रवाल को भी जाता है। जिसके चलते मंत्रिमंडल विस्तार में राजेश अग्रवाल के नाम पर विचार किया गया और उन्हें मंत्री पद का दायित्व सौंपा गया।
बृजमोहन अग्रवाल ने सांसद बनने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद छत्तीसगढ़ के मंत्रिमंडल में अग्रवाल समाज से कोई भी बड़ा नेता नहीं था। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में व्यवसायिक वर्ग का समर्थन भाजपा को मिलता रहा है। बृजमोहन अग्रवाल के जाने के बाद व्यवसायिक वर्ग को उम्मीद थी कि उनके ही समाज के किसी विधायक को मंत्रिमंड़ल में मौका दिया जाएगा। नतीजन व्यापारिक परिवार से आने वाले राजेश अग्रवाल को मंत्रिमंडल में जगह दी गई। गौरतलब है राजेश अग्रवाल के पिता चांदीराम अग्रवाल की गिनती लखनपुर उदयपुर क्षेत्र के प्रतिष्ठित और बड़े व्यापारियों में होती थी। यह एक बड़ा कारण बना जिसके चलते पहली बार का विधायक होने के बावजूद राजेश अग्रवाल को मंत्रिमंड़ल में जगह दी गई।