डीजे ढोल ताशे की अनुमति न मिलने से दुर्गा समितियों के पदाधिकारियों ने किया थाने का घेराव
गाइडलाइन के अनुसार ही करना होगा दुर्गा विसर्जन: पुलिस महकमा
– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर।एक दिन पहले ही पुलिस महकमे ने दुर्गा समितियां के साथ बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शासन के निर्धारित नियम अनुसार ही दुर्गा विसर्जन किए जाएंगे, और गाइडलाइन का पालन करते हुए ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग किया जाएगा। जिसे लेकर अब दुर्गा समितियां का विरोध सामने आया है। दुर्गा विसर्जन को लेकर संशय की स्थिति को देखते हुए विभिन्न दुर्गा समितियां से जुड़े पदाधिकारियों ने मंगलवार शाम को सिटी कोतवाली थाने का घेराव कर दिया।

करीब तीन सौ की संख्या में पहुंचे पदाधिकारियो ने कोतवाली पुलिस से कहा कि वह स्थिति स्पष्ट करें। दरअसल हाई कोर्ट के निर्देश पर पुलिस और जिला प्रशासन ने डीजे को लेकर गाइडलाइन तय की है। जिसके अनुसार 70 डेसीबल से अधिक साउंड वाले डीजे पर प्रतिबंध लगाया गया है।, क्योंकि यह लोगों के स्वास्थ्य के प्रतिकूल है । गणेश विसर्जन के दौरान भी कई डीजे पर नियम भंग करने के कारण कार्रवाई की गई है। वहीं दुर्गा आगमन के समय में भी कुछ डीजे संचालकों पर कार्यवाही करते हुए जुर्माना ठोका गया। यही कारण है कि विसर्जन के लिए डीजे संचालक हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं ।विसर्जन के लिए डीजे ना मिलने से परेशान समिति के पदाधिकारियो ने कोतवाली पहुंचकर कहा कि पुलिस उन्हें डीजे के साथ विसर्जन झांकी निकालने की अनुमति दें, क्योंकि पूरा शहर इसकी बाट जोह रहा है। ऐसा न होने से पुरानी परंपरा बाधित होगी। दुर्गा समिति के पदाधिकारी पुलिस गाइडलाइन के अनुसार 70 डेसीबल के निर्धारित स्तर पर डीजे बजाने के लिए सहमत हैं, लेकिन पुलिस की कार्यवाही के डर से डीजे संचालक पुलिस से अभय दान मांग रहे हैं। दुर्गा समितियों का कहना है कि हर वर्ष धूमधाम के साथ के साथ दुर्गा विसर्जन किया जाता है। लेकिन इस बार पुलिस की सख्ती की वजह से इसमें अड़चन आ रही है। समिति से जुड़े लोगों ने कहा कि पुलिस भेदभाव कर रही है। केवल गणेश और दुर्गा विसर्जन पर ही प्रतिबंध लगाया गया है जबकि इस बीच अन्य कई ऐसे आयोजन हुए, जिस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की । आगामी शादियों के मौसम में भी पुलिस का डीजे को लेकर क्या रवैया रहेगा इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिसे लेकर समिति के लोगोंने अपना विरोध दर्ज कराया। इधर कोतवाली थाना प्रभारी उत्तम साहू ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार ही दुर्गा विसर्जन किया जाएगा। इसमें पुलिस अपने स्तर पर किसी तरह की अलग रियायत देने की स्थिति में नहीं है। दरअसल परंपरा अनुसार दुर्गा विसर्जन बैंड बाजे, ढाक और ढोल ताशा के साथ की जाती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों में इसके साथ डीजे जुड़ गए। नगर ही नहीं बाहर से भी डीजे मंगाए जाते हैं जिनका साउंड सिस्टम इतना तेज होता है कि जिधर से गुजर जाए वहां लोगों की हालत खराब होने लगती है। खासकर बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगो की हालत इस वजह से बिगड़ सकती है। आम लोगों के लिए भी इसकी तेज ध्वनि असहनीय है।, जिसे लेकर जनहित याचिका लगाई गई थी। उसी पर हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश है। इधर दुर्गा समितियां पूर्व की भांति डीजे के साथ ही विसर्जन करने पर अड़े हुए हैं ।इस कारण से गतिरोध बना हुआ है। बड़ी संख्या में थाने पहुंचे दुर्गा समिति के पदाधिकारियो ने अपना विरोध दर्ज कराया। वही सोशल मीडिया पर यह खबर भी वायरल हो रही है कि इस मामले में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने मध्यस्थता कर डीजे के साथ विसर्जन की अनुमति हासिल कर ली है। लेकिन पुलिस के बयान इसके विपरीत है। ऐसे में डर यही है कि अगर डीजे के साथ विसर्जन किया जाता है तो फिर पुलिस डीजे संचालक के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। यही कारण है कि डीजे वाले विसर्जन में शामिल होने से कतरा रहे हैं। और इससे दुर्गा समितियां और उनके पदाधिकारी परेशान है।
दुर्गा विसर्जन की झांकियां सदर बाजार, सिटी कोतवाली से होकर जूना बिलासपुर की गलियों से पचरी घाट पहुंचती है । इस रिहायशी इलाके की गलियों में तेज डीजे की वजह घरों के दरवाजे खिड़कियां हिलने लगते हैं। लोगों की दिल की धड़कन तेज हो जाती है। यही कारण है कि एक बड़ा वर्ग इनका विरोध भी कर रहा है।, क्योंकि आधुनिक डीजे पूरी तरह से जन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है। समितियां को इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि उनके उत्सव से किसी की जान आफत में ना आ जाए।
