
बिलासपुर से सुधीर तिवारी
राशि स्टील एंड पावर प्लांट प्रबंधक के खिलाफ श्रमिक आंदोलन की राह पर
बिलासपुर/मस्तूरी– क्षेत्र अन्तर्गत ग्राम पराघाट मे राशि स्टील एंड पावर प्लांट प्रबंधक द्वारा लापरवाही बरतने का मामला सुर्खियों में हमेशा बना रहता है।
प्लांट प्रबंधक द्वारा श्रमिकों के जान के साथ खिलवाड भी किया जा रहा है। 20/05/2023 को 6 श्रमिक P.G.P मे जलकर झुलस गए थे। जिनको आज तक कोई मुआवजा राशि नही दिया गया है। एवं एक श्रमिक दिनांक 25/06/2023 को प्रथम तल से नीचे गीर कर दुर्घटना का शिकार हो गया था। किसानों के द्वारा अपने भूमियों को वसुंधरा स्टील प्लांट को नियम और शर्तों के अनुसार विक्रय किया गया था किंतु राशि स्टील के दलालों के द्वारा आपसी मिलीभगत कर लगभग 110 एकड़ भूमि को वसुंधरा से खरीद लिया गया है। उक्त सभी भूमियों पर आज तक किसान काबिज है वा जीवन यापन कर रहे हैं।किंतु राशि के द्वारा ईनके नाम पर भूमि का नामांतरण नही होने के बावजूद किसानो की भूमियों को धूल डस्ट से पाटा जा रहा है। जिससे सभी किसान आहत है। जिस पर शासन प्रशासन के द्वारा नामांतरण प्रक्रिया पुरी होने तक पटाई हेतु रोक लगाया जावे।
// *राशि स्टील एंड पावर प्लांट पराघाट द्वारा महिला श्रमिकों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही* /
महिला श्रमिकों के लिए सुलभ शौचालय का पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर महिला श्रमिको को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसके कारण महिला श्रमिकों को भारी तकलीफों का सामना करना पड़ता है।
//*सुरक्षा उपकरण दिए जाने पर वसूला जाता है रुपया…* //
श्रमिकों से सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिया जाता जिससे मजदूर लगातर दुर्घटना का शिकार हो जाते है। और अगर सुरक्षा उपकरण दिया भी जाता है, तो उसका वेतन से पैसा काट लिया जाता है।
//श्रमिकों ने शासन प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
*प्लांट प्रबंधक ने कहा कि जो भी आरोप लगाया जा रहा है वो निराधार है मै इस आरोप का खंडन करता हूं।*
नायब तहसीलदार उमाशंकर लहरे ने कहा कि जब राशी प्लांट पहुंचे तो प्लांट के सामने श्रमिकों द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से अपने मांगो को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल कर रहे थे। श्रमिक अपने मांगों पर अड़े हुए हैं।
//*सरपंच प्रदीप सोनी श्रमिकों के है साथ*/ /
पारा घाट के सरपंच प्रदीप सोनी ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रबंधन के द्वारा अपने रिश्तेदारों को प्लांट के अंदर नौकरी दिला कर हमारे ग्राम एवं क्षेत्र के श्रमिकों से भेदभाव किया जाता है और प्रबंधन के द्वारा श्रमिकों को सुरक्षात्मक सामान नहीं दिया जाता अगर दे भी दिया तो उनके तनख्वाह से काट लिया जाता है।
दुर्घटना में प्रभावित श्रमिकों को किसी भी प्रकार की मुआवजा नहीं दिया जाता जिसके कारण श्रमिकों में भारी रोष है। तथा जहरीली पानी लीलागर नदी में प्लांट के द्वारा छोड़ा जाता जिससे आम जनता के साथ जानवरों को भी जान का खतरा मंडराते रहता है। और कई प्रकार के आरोप उन्होंने प्लांट प्रबंधन के खिलाफ कहा।
