बिलासपुर से सुधीर तिवारी
बिलासपुर। शहर में जिस तरह की गतिविधियां हो रही है उसमें सबसे प्रमुख शराब पीकर अपराध करने की प्रवृत्ति ज्यादा पनप रही हैं। विगत कई दिनों में सरकंडा थाना से महज़ 100 मीटर के फासले पर संचालित है सर्व सुविधा युक्त अवैध चखना दुकान चल रही जिसमें कि हर प्रकार की सुविधा शराबियों को परोसा जा रहा है। जिसमे शराबियो को खाना पीना और उसके साथ ही उनको पूर्णतः आश्वस्त किया जाता है कि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। यहां जो शराबी आते हैं उन्हें सिर्फ अपने साथ अपनी मदिरा लेकर आनी पड़ती है बस बाकी डिस्पोजल से लेकर हर प्रकार के भोजन जिसमें की शाकाहारी एवं मांसाहारी खाने की अच्छी खासी व्यवस्था यहां पर उपलब्ध है। उनके द्वारा दिए गए आश्वासन से तात्पर्य है की किसी भी प्रकार से पुलिस द्वारा उन्हें परेशानी नहीं होगी। सुबह से लेकर रात तक सरकंडा थाना के ठीक सामने शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है इसका अंदाजा वहां से गुजरने पर चखना दुकान के बाहर खड़े वाहनों से लगाया जा सकता है। दुकान के ही ठीक सामने एसईसीएल का गेट है, सूत्रों के मुताबिक यहां सुबह से ही ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों की महफिल सज जाती है जोकि आराम से शराब का पूरा लुफ्त खाने के साथ उठाते हुए चलती है वह भी बिना किसी रोक-टोक और परेशानी के। रात 11:00 बजे तक यह चखना सेंटर उर्फ ढाबा आराम से संचालित होता है। अब सोचने का विषय यह है कि ऐसा क्या है सरकंडा थाना को यह चखना दुकान नजर ही नहीं आती है दबी जुबां पर लोगों ने इसके कारण भी बताएं पर यह सुनी सुनाई बातें हैं सच क्या है यह सोचनीय विषय बना हुआ है। दुकान सामने से खुली हुई है इसमें कोई दरवाजा नहीं है मेन रोड से निकलते वक्त गौर से अंदर देखा कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां क्या होता है। मेन रोड से 10 फीट की दूरी पर रोजाना अनगिनत बार पुलिस की गाड़ियां निकलती है जिनमें थाना प्रभारी, अधिकारियों, पेट्रोलिंग गाड़ी वगैरह शामिल होती है ,फिर भी बेखौफ यह दुकान निरंतर चलती आ रही है। कोई भी थाना प्रभारी रहे इस चखना दुकान के संचालन पर कोई भी फर्क नहीं पड़ता यह अपनी सुविधा शराबियों को बराबर देती है। सरकंडा थाना को अपने समीप हो रहे इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है, तो इतने बड़े सरकंडा क्षेत्र को किस तरह से संभाला जाएगा। जिस तरह से शहर में आए दिन अपराध बढ़ रहे हैं और अंकुश लगाने की दिशा में पुलिस के द्वारा सदैव पहल की जाती है पर यह चखना सेंटर क्यों और कैसे चल रहा है इस विषय में वअभी तक विचार क्यों नहीं किया गया है ? जो काफी सोचनीय और गंभीर विषय बना हुआ है।

