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झारखंड के सीएम हेमंत का इस्तीफा तय, छत्तीसगढ़ में शरण ले सकते हैं यूपीए विधायक

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रांची/रायपुरः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का इस्तीफा तय है। ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में राज्यपाल रमेश बैस ने उनकी विधानसभा की सदस्यता खारिज करने का आदेश दे दिया है, लेकिन प्रक्रिया के अनुसार इस संबंध में आधिकारिक पत्र निर्वाचन आयोग जारी करेगा। इसके बाद संवैधानिक बाध्यताओं के चलते हेमंत सोरेन को त्यागपत्र देना पड़ेगा। इस राजनीतिक संकट से निपटने के लिए यूपीए विधायकों ने शनिवार को सीएम हाउस में बैठक की और फिर तीन बसों में बैठकर सुरक्षित ठिकाने के लिए रवाना हो गए।
किस सेफ जोन में रहेंगे विधायक
सीएम हेमंत सोरेन, मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम, बन्ना गुप्ता, चंपई सोरेन, सत्यानंद भोक्ता सहित लगभग 40 विधायक बैठक में मौजूद रहे। नई सरकार के गठन की कवायद शुरू होने के पहले यूपीए के विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ या रांची से बाहर किसी रिसॉर्ट में शिफ्ट किया जा सकता है।
सीएम आवास में बैठक के बाद यूपीए के 40 से अधिक विधायक अज्ञात स्थान के लिए रवाना हुए हैं। विधायकों की बस लतरातू डैम की ओर गई है। कहा जा रहा कि सभी विधायक छत्तीसगढ़ या बंगाल की ओर जाएंगे। हालांकि जानकारों का मानना है कि यह सब यूपीए महागठबंधन की तरफ से भ्रम जाल फैलाया जा रहा है।
यूपीए के सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय आज रात फ्लाइट से रांची आने वाले हैं। रांची में वे कांग्रेस विधायकों की बैठक की अध्यक्षता करेंगें। ऐसे में कांग्रेस विधायकों को रांची से बाहर ले जाने की योजना पर सस्पेंस है।
विधायकों की बस कार्केड के साथ रवाना हुई है। कार्केड में एंबुलेंस भी मौजूद है। कार्केड चालकों बताया कि उन्हें केवल साथ चलने को कहा गया है। विधायक कहां जाएंगे, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
पत्थर खदान से सियासी संकट
झारखंड में राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि में रांची के अनगड़ा में स्थित पत्थर की एक खदान है। हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री रहते हुए 88 डिसमिल क्षेत्रफल वाली यह पत्थर खदान लीज पर ली थी। भाजपा ने इसे ऑफिस ऑफ प्रॉफिट और जन प्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन का मामला बताते हुए राज्यपाल के पास शिकायत की थी।
राज्यपाल ने इस पर चुनाव आयोग से राय मांगी। आयोग ने शिकायतकर्ता और हेमंत सोरेन को नोटिस जारी कर इस मामले में उनसे जवाब मांगा और दोनों के पक्ष सुनने के बाद चुनाव आयोग ने गुरुवार को राजभवन को भेजे मंतव्य में इसे ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला करार देते हुए हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी।
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