रायपुर छत्तीसगढ़। धान के फसल में बढ़ते लागत से किसान परेशान हैं धान की पैदावार बढ़ाने के लिए रसायनिक खादो का अत्याधुनिक प्रयोग जल, जमीन और पर्यावरण जीव जन्तु के लिए अहितकर है इसलिए गौ आधारित प्राकृतिक खेती का विस्तार करना अति आवश्यक है छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जहां में पारंपरिक तरीके से खेती करने के शासन द्वारा गोबर और गोमूत्र की खरीदी की जा रही हैं ।
छत्तीसगढ़ राज्य के बेमेतरा जिले के नगर पंचायत नवागढ़ के युवा किसान किशोर कुमार राजपूत ने पंचगव्य खाद का प्रयोग कर एक एकड़ में श्री राम धान की 25 क्विंटल पैदावार ली है। पंञ्चव्य से पानी व खाद की कम मात्रा से भी अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
किशोर राजपूत ने बताया कि पंचगव्य खाद को अपना कर पैदावार में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है।
पञ्च गव्य से धान की खेती करने के लिए एक एकड़ में दो किलो बीज उपयोग होता है। 10-12 दिन की पौधें की कटाई कर रोपाई की जाती है। इससे पौधे की फुटाव शक्ति सामान्य से दो से तीन गुणी अधिक होती है। पौधे से पौधे की दूरी 8 वर्ग इंच के फासले पर लगाया जाता है।
उन्हाेंने बताया कि रोपाई के बाद एक सप्ताह में एक हल्का पानी और पञ्च गव्य खाद की सिंचाई की जाती है।10 लीटर पानी में 250 ग्राम पंचगव्य मिलाकर छिड़काव करना चाहिए इस खाद से पौधे के कंसे से 50 से 55 शाखाओं पर बालियां निकलती हैं। जो सामान्य धान की रोपाई से दोगुनी बालियाें से अधिक होती हैं। इस खाद से 25 क्यूंटल तक धान की पैदावार ली जा चुकी है।
किशोर राजपूत ने बताया कि सामान्य तरीके से रोपाई किए गई धान की फसल में 35 किलो प्रति एकड़ बीज,50 किलो डीएपी, 50 किलो यूरिया खाद व कई प्रकार की कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है और पैदावार 20 से 25 क्विंटल होती है जबकि पंचगव्य की खाद से आधा खर्च होता है और दाने की गुणवता ज्यादा व पैदावार ढाई गुणा अधिक होती है। यह प्राकृतिक खाद किसान की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव लाने में मददगार होगी व घटते भूजल तथा रासायनिक खाद की कम मात्रा से कम खर्च में अधिक पैदावार होगी।

