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गनियारी लोककला महोत्सव में बिखरे संस्कृति के विविध रंग..देश व प्रदेश के कलाकारों ने अलग – अलग विधाओं में छोड़ी छाप

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00 देश व प्रदेश के कलाकारों ने अलग – अलग विधाओं में छोड़ी छाप
00 मध्यप्रदेश का गुदुम बाजा और महाराष्ट्र की लावणी ने मोहा मन
तापस सन्याल भिलाई-3 / गनियारी लोककला महोत्सव में पारम्परिक कला और संस्कृति का विविध रंग देखने को मिला।‌ इस दो दिनी आयोजन में देश के साथ ही छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों ने अलग – अलग विधाओं में मंचीय प्रस्तुति देकर अपनी कला और संस्कृति से दर्शकों को अवगत कराया। मध्यप्रदेश का गुदुम बाजा और महाराष्ट्र की लावणी नृत्य ने कार्यक्रम में मौजूद हर किसी का मन मोह लिया।
गुरु घासीदास कला एवं साहित्य विकास समिति द्वारा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से भिलाई – चरोदा नगर निगम क्षेत्र के गनियारी गांव में दो दिनी लोककला महोत्सव का आयोजन 26 व 27 फरवरी को किया गया। गनियारी लोककला महोत्सव के नाम से होने वाले इस आयोजन के जनक भिलाई – चरोदा महापौर एवं गुरु घासीदास कला एवं साहित्य विकास समिति के अध्यक्ष निर्मल कोसरे हैं। इस महोत्सव के दोनों दिन छत्तीसगढ़ राज्य सहित अन्य प्रांतों से आए हुए लोक कलाकारों ने अपनी कला और संस्कृति का विविध रंग बिखेरते हुए दर्शकों को झूमने में मजबूर कर दिया।
गनियारी लोककला महोत्सव का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका पद्म भूषण डॉ. तीजन बाई ने किया। अध्यक्षता मुख्यमंत्री के ओएसडी मनीष बंछोर ने की। आयोजन के प्रथम दिवस सत्य के अमर ज्योति पार्टी भेलवाडीह रायपुर की चौका आरती, भर्री गांव बालोद की रामधुनी झांकी, पिटौरा दुर्ग की पंथी नृत्य, मीना साहू एवं साथी रनचिरई बालोद की पंडवानी, चंपारण गरियाबंद का राऊत नाचा, कोदवा बेमेतरा का डंडा करमा, महेन्द्र निषाद एवं साथी तरौद बालोद का हास्य प्रहसन एवं कु. आरु साहू एवं साथी जोगीडुला जिला धमतरी की मंचीय प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ की पारम्परिक कला और संस्कृति की अनुपम छटा देखते बनी। इसके अलावा सुनील सोनी नाइट रायपुर के द्वारा छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के 27 फरवरी को समापन समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सुपुत्र चैतन्य बघेल मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता पद्मश्री डॉ आर एस बारले, विशिष्ट अतिथि सुश्री अमृता बारले, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष जवाहर वर्मा उपस्थित रहे। इस अवसर पर दानी राम बंजारे एवं साथी मर्रा दुर्ग की गोपी चंदा भजन, कांकेतरा राजनांदगांव का रामायण, नाथू नवागांव राजनांदगांव की पंथी नृत्य, मुंदगांव डोंगरगढ़ की देवी जस झांकी, सिहावा धमतरी का आदिवासी नृत्य, बकली धमतरी का फागगीत, निपानी बालोद का नाचा गम्मत एवं रामविलास खुंटे जांजगीर के द्वारा सतनाम भजन प्रस्तुत किया गया। अंत में गुरूर निवासी दुष्यंत हरमुख के नेतृत्व में लोक संगीत समूह रंग झरोखा की प्रस्तुति ने गनियारी लोककला महोत्सव को यादगार बना दिया।
महापौर एवं गुरु घासीदास कला व साहित्य विकास समिति के अध्यक्ष निर्मल कोसरे ने अतिथियों और आए हुए लोक कलाकारों को सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दोनों दिन निगम के पार्षद एवं अन्य जनप्रतिनिधि सहित ग्रामीणों ने अपनी सहभागिता देकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन समिति के सदस्य गण पूर्व पार्षद धर्मेन्द्र कोसरे, हेमंत कोसरे,सवल राम बंधे, राजकुमार गायकवाड़, सुरेश टंडन, डोमन लहरे, राजू लहरे, टोमन जोशी, मूलचंद टंडन, चैत रिगरी, विजय रिगरी, बुधारू बंधे,मिलऊ कोसरे, कृपाराम बंजारे आत्मा बंजारे, सौरभ मिश्रा, गणेश यादव, कामता साहू, आकाश टंडन, सोनू बंजारे, सहित सैकड़ों ग्राम वासी उपस्थित रहे।

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