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निर्दोष प्रदर्शनकारियों के ऊपर लगे धाराएं रद्द हो अन्यथा होगा जेल भरो आंदोलन: सुरेश दिवाकर

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कमलेश लहोतरे/  बिलासपुर। आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेता सुरेश दिवाकर ने कहां कि पदोन्नति में आरक्षण की मांग को लेकर 4 फरवरी को हुए राजधानी सहित छत्तीसगढ़ महाबंध के दौरान हमारे निर्दोष प्रदर्शनकारियों के ऊपर दुर्भावनापूर्ण अपराध पंजीबद्ध करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों एवं अनुविभागीय अधिकारी पर तत्काल कार्यवाही हो और निर्दोष प्रदर्शनकारियों के ऊपर दुर्भावना पूर्ण किए गए अपराध को रद्द करें अन्यथा होगा जेल भरो आंदोलन। श्री दिवाकर ने आगे कहा कि आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा छत्तीसगढ़ एवं सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के बैनर तले 48 संगठनों के साझा मंच द्वारा पदोन्नति में आरक्षण की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई थी।जिसकी सूचना पूर्व में ही सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, पुलिस महानिरीक्षक रायपुर, जिलाधीश रायपुर, पुलिस अधीक्षक रायपुर सहित अनु विभागीय अधिकारी रायपुर को चरणबद्ध आंदोलन की सूचना ज्ञापन की छाया प्रति के साथ दी गई थी। चरणबद्ध आंदोलन के प्रथम चरण में 19 जनवरी को शासन प्रशासन को ज्ञापन दिया गया था द्वितीय चरण में 20 जनवरी को रायपुर में मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया किया गया था। तीसरे चरण के आंदोलन में 22 जनवरी को सभी संभागीय मुख्यालयों में मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया गया था।आंदोलन के चौथे चरण में सभी आरक्षित जनप्रतिनिधियों की शव यात्रा निकालकर पुतला दहन किया किया गया था। आंदोलन के पांचवे चरण में 4 फरवरी को धरना प्रदर्शन जल सत्याग्रह कर राजधानी सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश महाबंद की घोषणा की गई थी।*

*सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाव के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने कहा कि उक्त आंदोलन के पांचवें चरण में रायपुर के बूढ़ा तालाब स्थल में धरना प्रदर्शन कर प्रदेशभर से आए अधिकारी कर्मचारी एवं सामाजिक संगठनों के साथ आम जनता ,ज्ञापन देने के लिए मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश की। सप्रे शाला मैदान के पास पुलिस ने बैरिकेट्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। चूंकि पूर्व में ही राजधानी सहित प्रदेश बंद के आह्वान की घोषणा गई थी। इसलिए प्रदर्शनकारियों ने जय स्तंभ चौक होते हुए अंबेडकर चौक तक शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।*
आरक्षण बचाओ मोर्चा के नेता सुरेश दिवाकर और सुभाष परते ने राज्यपाल सहित मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महा निरीक्षक को ज्ञापन देकर निम्न बिंदुओं पर जांच कर शिकारियों पर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करते हुए निर्दोष प्रदर्शनकारियों के ऊपर लगाए गए जमानती एवं गैर जमानती धाराओं को रद्द करने की मांग की है।  दिवाकर ने अपने ज्ञापन में कई बिंदुओं पर जवाब मांगते हुए न्याय देने की मांग कर जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी है-

1.यह की उक्त विरोध प्रदर्शन और राजधानी बंद की घोषणा में प्रदर्शनकारियों ने किसी भी व्यापारी या दुकानदार को दुकानें बंद करने के लिए नहीं कहा और न हीं किसी व्यापारी से या किसी आम राहगीर से किसी प्रकार की बहस बाजी की गई।
2. यह की सिटी कोतवाली के पास प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में बैठा कर वहां से यह कह कर ले गई कि आप लोगों को धरना स्थल पर छोड़ दिया जाएगा।
3. यह की पुलिस प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल न ले जाकर सीधे सेंट्रल जेल ले गई और वहां पुलिस द्वारा यह कहा गया कि आप लोगों के नाम पता लिखकर आप लोगों को नि:शर्त छोड़ दिया जाएगा।
4. यह की जेल परिसर में रखे प्रदर्शनकारियों को एक ठाकुर पुलिस अधिकारी द्वारा अपने जाति का रौब दिखाकर डराया धमकाया जा रहा था और जानबूझकर उकसाने का प्रयास किया जा रहा था इसी वजह से बार-बार वहां पर विवाद की स्थिति निर्मित हो रही थी।
5. यह की जेल परिसर में रखे लगभग 300 प्रदर्शनकारियों को एक-एक कर छोड़ दिया गया लेकिन रात 9 -10 बजे के दरमियान 10 प्रदर्शनकारियों को रोक लिया गया और उनके ऊपर प्रतिबंधात्मक धारा लगा दी गई।
6. यह कि यह जानते हुए उन 10 प्रदर्शनकारियों में से दो व्यक्ति शिक्षक हैं और बाकी पढ़ने वाले विद्यार्थी इन सभी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के उद्देश्य से ही पुलिस जानबूझकर ही षडयंत्र पूर्वक उन सभी के खिलाफ गैर जमानती धाराएं लगाई गई है।
7. यह कि सिटी कोतवाली और सिविल लाइन थाना द्वारा 10 व्यक्तियों को टारगेट करके जेल परिसर में उनके नाम नंबर और पता लेकर आम राहगीर के माध्यम से झूठी कहानी बनाकर तथा ड्यूटी कर रहे पुलिस कर्मचारियों को चोट लगी है कहकर एफ आई आर दर्ज करवाई गई है,यह पुलिस की दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही का परिचायक है।
8.जिन 10 प्रदर्शनकारियों के ऊपर विभिन्न धाराओं के तहत कार्यवाही की गई है वे सभी किसी भी अप्रिय घटना को अंजाम देने के दोषी नहीं हैं। पुलिस के पास ऐसी कोई भी वीडियो रिकॉर्ड नहीं है कि ये सभी किसी अप्रिय घटना को अंजाम दिए हैं।
9. यह कि पुलिस महानिरीक्षक रायपुर के द्वारा सभी जिला पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिया गया था 4 फरवरी को प्रदेश महा बंद की घोषणा की गई है। अतः सभी पुलिस अधिकारी शांति व्यवस्था कायम करें,परंतु उक्त आदेश को पुलिस अधिकारियों द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया। पुलिस प्रशासन की लचर व्यवस्था के कारण आला अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को फटकार लगाई गई जिससे बचने के लिए रायपुर पुलिस द्वारा निर्दोष प्रदर्शनकारियों के ऊपर गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दिया गया जो पूर्णता गैरकानूनी है। निर्दोष प्रदर्शनकारियों के ऊपर पुलिसिया तानाशाही एवं दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही है।
10.यह कि 19 जनवरी से दिए गए पूर्व सूचना के बाद भी शासन प्रशासन के जिम्मेदार लोग प्रदर्शन करने वाले मोर्चा के प्रतिनिधि मंडल से मिलकर बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करना तक उचित नहीं समझा। हम लोग अपने पूर्वजों के प्रतीक स्थल जय स्तंभ चौक और संविधान निर्माता डॉ भीम राव अंबेडकर जी के प्रतिमा स्थल माल्यार्पण कर शासन प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन देकर अपनी बात रखना चाह रहे थे,परन्तु वहां हमारी बात सुनने व ज्ञापन लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारियों की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी। शुरू से ही इस आंदोलन को दुर्भावना पूर्ण नजरों से देखा जा रहा था।
11.यह कि हमारे लोग शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक ढंग से ज्ञापन देने के लिए निकले थे पर पुलिस हमें जबरिया बल पूर्वक रोकती रही।हमारे लोग निहत्थे थे हाथों में तख्तियां रखे अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ रहे थे। आंदोलन करने वालों ने न केवल भीम आर्मी के बल्कि एससी एसटी वर्ग के सभी सामाजिक और अधिकारी कर्मचारी संगठनों के लोग थे।
12.यह कि एससी एसटी एकता को खंडित करने की नियत से ही पुलिस प्रशासन द्वारा अनुसूचित जन जाति के व्यतियों को सामने रखकर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के ऊपर एफ आई आर दर्ज करा सामाजिक सौहार्द को खंडित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।

अतः महोदय से निवेदन है कि उक्त घटना की निष्पक्ष जांच करते हुए झूठी कहानी गढ़कर हमारे 10 प्रदर्शनकारी साथियों के ऊपर विभिन्न जमानती एवं गैर जमानती धाराओं के तहत पंजीबद्ध किए अपराध को रद्द कर उनके भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ से बचाते हुए उन सभी को न्याय दिलाने की कृपा करें।
अगर दोषी पुलिस अधिकारियों और अनु विभागीय अधिकारी के ऊपर तत्काल कार्यवाही नहीं की गई तो पुनः प्रदेश भर के लोग रायपुर में जेल भरो आंदोलन के तहत गिरफ्तारी देने के लिए बाध्य होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

उक्त आशय की जानकारी प्रदेश मीडिया प्रभारी विजय कुमार कुर्रे शिव साथी कमल कुर्रे दिलीप दिवाकर नरेंद्र जांगड़े, मनीष रात्रे व विजय मेश्राम ने संयुक्त रूप से दिया।

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