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जाने किस शहर में थी भाई-बहन के बीच सेक्स संबंध बनाने की मान्यता ,अब इस पर रोक लगाने की सरकार ने की घोषणा

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पेरिस। आज बात करते है ,कुछ कानून के बारे में जो बहुत ही कड़े कानून (strict laws) माने जाते है। ये तो आप भी जानते है कि भाई -बहन या बाप -बेटी का रिश्ता बहुत ही पवित्र माना जाता। परन्तु कुछ जगहों में ऐसा नहीं था। जी हां हम बात कर रहे हैं फ्रांस कि आपको बता दें कि फ्रांस (France) सरकार ने पारिवारिक यौन संबंध पर प्रतिबंध लगाने कि घोषण कि है। फ्रांस( France) में बच्चों को छोड़कर अनाचार (incest) को इस समय कानूनी दर्जा प्राप्त है। फ्रांस के बाल संरक्षण राज्य मंत्री एड्रियन टैक्वेट (Adrien Taquet) का कहना है कि सरकार ऐसे रिश्तों को आपराधिक मानती है, चाहे ही दोनों की उम्र 18 साल के अधिक ही क्यों न हो। कौटुंबिक व्यभिचार या अनाचार एक ही परिवार के सदस्यों (जैसे भाई और बहन) के बीच गैर-कानूनी यौन संबंध को कहते हैं।

मंत्री के बोल
समाचार एजेंसी एएफपी ने टैक्वेट का हवाला देते हुए कहा कि नया कानून समाज में स्पष्ट रोक जारी करने के लिए है। अनाचार समाज में स्वीकार्य नहीं है। चाहे कोई भी उम्र हो। उनका कहना है कि ना ही आप अपने पिता, अपने बेटे या अपनी बेटी के साथ यौन संबंध नहीं रख सकते हैं। यह उम्र का सवाल नहीं है, यह वयस्कों की सहमति का सवाल नहीं है। हम कौटुंबिक व्यभिचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनाचार के लिए 18 साल की सीमा की समीक्षा की जाएगी। चचेरे भाइयों को अभी भी बदले हुए नियमों के तहत शादी करने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया कि क्या प्रस्तावित कानून का विस्तार सौतेले परिवार तक होगा या नहीं।

1791 में कानून में बदलाव हुआ था
चाइल्ड प्रोटेक्शन चैरिटी लेस पैपिलॉन्स के अध्यक्ष लॉरेंट बोएट ने उठाये गए कदम का स्वागत करते हुए कहा कि अनाचार को कानूनी रूप से बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि यह पहले से ही सामाजिक रूप से निषिद्ध था। 1791 में, अनाचार, ईशनिंदा और सोडोमी को फ्रांसीसी दंड संहिता से अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया था। उनका मानना है कि अगर कोई पीड़ित नहीं है तो वह कोई अपराध नहीं है। पिछले साल फ्रांस ने बलात्कार रोधी कानून में बड़ा बदलाव किया था। जिसके बाद से 15 साल के कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने को बलात्कार माना जा रहा है।

इस तरह के कानून खुद की इच्छा से शारीरिक संबंध बनाने के अधिकार का हनन है ।

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