रायपुर। भूपेश कैबिनेट की अहम बैठक 22 नवम्बर को बुलाई गई है. बैठक में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है. करीब दो महीने से अधिक वक्त के बाद आहूत हो रही इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई है. वहीँ बैठक के लिए विभागों के सचिवों से प्रस्ताव मंगाए जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि कैबिनेट की बैठक में छोटे बच्चों के लिए स्कूल खोले जाने पर चर्चा की जा सकती है. वहीँ धान के अवैध परिवहन और बेस्ट पुलिसिंग पर चर्चा संभव है. बता दें कि पहले अफसरों ने संकेत दिए थे कि दिवाली के बाद छोटे बच्चों के लिए स्कूल खोले जाएंगे, मगर कोरोना संक्रमण को देखते असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में कैबिनेट में इस पर विचार किया जा सकता है.
इसके अलावा एक दिसंबर से धान खरीदी और विवेकानंद जयंती के मौके पर दो दिन का युवा महोत्सव मनाने पर भी मंथन किया जा सकता है। वहीँ कर्मचारियों के महंगाई भत्ता को लेकर भी निर्णय किया जा सकता है.
कैबिनेट की आगामी बैठक में प्रदेश के राईस मिलर्स को अहम राहत मिल सकती है। प्रदेश के क़रीब 1900 राईस मिलर्स में बहुतायत पर पैनल्टी लगी हुई है और यह राशि डेढ़ सौ करोड़ के लगभग है। राईस मिलर्स इस पैनल्टी को लेकर राज्य सरकार से लगातार आग्रह करते रहे हैं, प्रभावशाली राईस मिलर्स एसोसिएशन का इस मसले पर तर्क भी राज्य सरकार को पेशोपेश में डालते रहा है। जाहिर है, 22 नवंबर को कैबिनेट की बैठक होने जा रही है।
मिलर्स पर पैनाल्टी तब लगती है जबकि मिलर्स डीओ के अनुरुप व्यवहार नहीं कर पाते। मिलर्स को धान का उठाव करना है, और चावल को गोदाम पहुँचाना है। पर दोनों ही मौकों पर मिलर्स का तर्क यह होता है कि व्यवस्थागत चूक की वजह से कई बार धान का उठाव नहीं हो पाता है और गोदाम ही यदि ख़ाली नहीं मिलेगा तो मिलर चावल को जमा कहाँ करेगा।
राईस मिलर्स पर अभी क़रीब डेढ़ सौ करोड़ की पैनाल्टी लगी हुई है। लेकिन राईस मिलर तथ्यों के साथ सहमत करने में सफल हो गए हैं कि पैनाल्टी में दोष राईस मिलर्स का नहीं है।
खबरें हैं कि कैबिनेट की बैठक में पैनाल्टी माफ़ करने का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। बहुत ज़्यादा संभावना है कि कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल जाए।

