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ममता श्री सिंह के प्रथम काव्य संग्रह “मेरी ख़्वाहिशों को पंख दो” का लोकार्पण समारोह संपन्न

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कविता लिखने की वजह नहीं, जीने की वजह होती हैं : कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी
“मेरी ख़्वाहिशों को पंख दो” लोकार्पित..

कमलेश लव्हात्रे/बिलासपुर :  बिलासपुर के होटल ग्रैंड अम्बा में, श्रीमती. ममता श्री सिंह के प्रथम काव्य संग्रह “मेरी ख़्वाहिशों को पंख दो”का लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया, जिससे परम आदरणीय आचार्य अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़ की अध्यक्षता में, सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत, ज्ञान की देवी सरस्वती वंदना से की गई,सम्मानित अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ से किया गया।अपने अध्यक्षीय भाषण में अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी सर ने कहा की”कविता लिखने की वजह नहीं है, जीने की वजह होती है, कविता को चिकित्सक की भूमिका निभानी होती है। वही बतौर मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय सतीश जायसवाल प्रसिद्ध कथाकार एवं वरिष्ठ पत्रकार ने कहा की, ग़ज़िआबाद की ममता श्री केवल बिलासपुर अपनी पुस्तक का विमोचन करने नहीं बल्कि संबंधों का विस्तार करने आई हैं।

वह अपने ख़्वाहिशों को पंख को अपनी जन्मभूमि बिलासपुर में ,धीरे- धीरे खोलने आई है,औऱ खोल लिया है। वही उनके काव्य गुरु शमीम फ़िरोज शमीम ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की,वहीं अपने चिर परिचित अंदाज़ में, प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि राजेन्द्र मौर्य ने भी उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की,उदबोधन वक्तव्य में डॉ. राहुल गेडाम ने उनकी काव्य यात्रा की चर्चा की ,तथा उनको गेडाम परिवार की तरफ़ से शुभकामनाएं दीं। मंच संचालन की ज़िम्मेदारी प्रसिद्ध कवियत्री एवं उदघोषिका अनु चक्रवर्ती ने अपने कवियत्री अंदाज़ में, उनकी दिलकश आवाज़ में कार्यक्रम को चार चाँद लगा दिया।

शहर के गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में शामिल हुए।अंत मे श्रीमती. ममता श्री सिंह ने अपनी काव्य संकलन एवं उनकी इस काव्य यात्रा की विस्तृत चर्चा की औऱ उन्होंने अपने काव्य संग्रह से ,अपनी माता श्री को समर्पित एक कविता सुनाई,जिसमें सभी भावुक हो गए।उन्होंने ,इस पल को गौरवशाली पल बताया। जिनमें प्रमुख रूप से कंचन पाटिल,जिला अभियोजन अधिकारी बिलासपुर ,उज़्मा अख्तर, डॉ संजय पांडे , डॉ राजेश कुमार साहू,डॉ शबाना यास्मीन ख़ान, राजेश नायक ,मौजूद रहे।

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