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अंतर्राष्ट्रीय छड़ी दिवस आज 15 अक्टूबर

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(रायपुर ब्यूरो ) | दृष्टि दिव्यांगों के गतिशीलता का प्रतीक अंतर्राष्ट्रीय छड़ी दिवस प्रति वर्ष 15 अक्टूबर को मनाया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय छड़ी दिवस के उपलक्ष में शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मठपुरैना, रायपुर में ऑनलाइन मोबिलिटी (चलिष्णुता ) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया एवं विजेता प्रतिभागियों को विद्यालय प्रारंभ होने पर पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है |

श्वेत छड़ी दृष्टि दिव्यांगों की आंख की तरह कार्य करता है क्योंकि छड़ी के माध्यम से दृष्टि दिव्यांग व्यक्ति मार्ग में स्थित बाधाओं को आसानी से समझ पाता है और वातावरण में स्वतंत्रतापूर्वक चल सकता है | कई वर्षों से विद्यालय में मोबिलिटी (श्वेत छड़ी) प्रशिक्षण द्वारा विद्यार्थियों को स्वावलंबी बनाया जा रहा है |

दृष्टि दिव्यांगों को एक दिशा देने हेतु सन 1930 में संयुक्त राज्य अमेरिका के “द लॉयन क्लब ऑफ प्रिटोरिया” में व्हाइट केन लॉ (श्वेत छड़ी कानून/नियम ) बनाया गया था |

जिसके अनुसार यदि कोई दृष्टि दिव्यांग व्यक्ति श्वेत छड़ी के द्वारा सड़क पार कर रहा हो, तो सभी वाहन एवं व्यक्तियों को रुक जाना चाहिए एवं दृष्टि दिव्यांग व्यक्ति के सड़क पार कर लेने के पश्चात ही उन्हें जाना चाहिए | इन्हीं सब नियमों हेतु जन चेतना विकसित करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ने 6 अक्टूबर 1964 को यह निर्णय लिया कि प्रतिवर्ष 15 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय छड़ी दिवस मनाया जाए। इस प्रकार 15 अक्टूबर 1964 से प्रतिवर्ष इस दिन को विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय छड़ी दिवस के रूप में आयोजित कर श्वेत छड़ी को दृष्टि दिव्यांगों की गतिशीलता के प्रतीक के रूप में मान्यता प्रदान किया जा रहा है साथ ही जनसाधारण में दृष्टि दिव्यांगों की स्वीकार्यता में वृद्धि की जा रही है |

भारत में सबसे पहले श्वेत छड़ी का परिचय कराने का श्रेय एन. ए. बी. मुंबई को जाता है, जिन्होंने 1958 में श्वेत छड़ी का वितरण अपने संस्था के विद्यार्थियों को किया। उसके पश्चात लायंस क्लब मुंबई ने श्वेत छड़ी की गतिविधियों में गति लाने हेतु श्वेत छड़ी का वितरण व्यापक स्तर पर किया। इस प्रकार धीरे-धीरे संपूर्ण भारत में दृष्टि दिव्यांगों द्वारा श्वेत छड़ी उपयोग का प्रचलन बढ़ गया | मोबिलिटी हेतु आज कई तरह की छड़ियां उपलब्ध है जैसे श्वेत छड़ी, फोल्डिंग छड़ी एवं स्मार्ट छड़ी | वर्तमान में इसका प्रशिक्षण दृष्टि दिव्यांगों के पुर्नवास एवं अन्य गतिविधियों हेतु अनिवार्य है |

दृष्टि दिव्यांगों को श्वेत छड़ी का प्रयोग करते समय कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है उसमें से एक मुख्य समस्या जनसाधारण द्वारा उनकी इस उपयोगिता से अनभिज्ञ होना है कई लोग उनके इस तरह छड़ी उपयोग करने पर अनुचित शब्द एवं अभद्र टिप्पणी करते हैं जिससे वे हतोत्साहित होकर छड़ी का उपयोग करने हेतु संकोच करते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं |

आप सभी से विनम्र आग्रह है कि भविष्य में कभी दृष्टि दिव्यांगों का सामना हो तो उनकी सहायता करें | उनके सड़क पार करते समय रुक जाए, उन्हें अपने गंतव्य स्थान तक जाने में मदद करें और सदैव सुरक्षित स्थान पर छोड़ें | मार्ग में आने वाले विभिन्न प्रकार की अन्य बाधाओं को दूर करने के लिए बैरियर फ्री एनवायरमेंट बनाने का प्रयास करें ताकि वे आत्मनिर्भर होकर स्वतंत्र रूप से मोबिलिटी कर सके | आपके इस सकारात्मक व्यवहार से वह स्वयं को इस समाज का अंग समझ कर मुख्यधारा से जुड़ सकेगा |

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