रायपुर: हसदेव अरण्य को बचाने के लिए सरगुजा और कोरबा के आदिवासी ग्रामीण 300 किलोमीटर पैदल चलकर बुधवार को रायपुर पहुंचे। आदिवासी हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त कोयला खनन परियोजना निरस्त करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्यपाल अनुसुईया उइके से मुलाकात करने आए थे, लेकिन मुलाकात नहीं हुई। अब राज्यपाल से आदिवासियों की गुरुवार को मुलाकात होगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हसदेव बचाओ पदयात्रा से जुड़े सवाल पर कहा कि जो बातचीत करना चाहें, हम तो सबसे बात कर रहे हैं।
किसी को कोई मनाही नहीं है, लेकिन उनके तरफ से कोई आफर नहीं आया कि हमसे मिलेंगे। जो मिलना चाहे सबके लिए दरवाजा खुला है। सब मिल सकते हैं। सब बात कर सकते हैं। बातचीत से ही समस्या का समाधान होगा। मुख्यमंत्री बघेल के बयान के बाद हसदेव बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने कहा कि पता नहीं क्यों मुख्यमंत्री कार्यालय ने आदिवासियों से सीएम की मुलाकात के लिए समय मांगने की सूचना नहीं दी है। मुख्यमंत्री के ओएसडी को आठ अक्टूबर को फोन कर बताया था कि 13 अक्टूबर को पदयात्री रायपुर पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री से मुलाकात करना है।
मुख्यमंत्री निवास में ही सूचनाओं का आदान-प्रदान न होना बेहद दुखद है। वहीं, देर शाम मंत्री टीएस सिंहदेव आदिवासियों के समर्थन में पहुंचे। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने नो गो एरिया तय किया था, उसे पार करेंगे तो मेरा विरोध रहेगा। नो गो एरिया लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए। आदिवासियों के मंच पर पहुंचे सिंहदेव ने कहा कि लक्ष्मण रेखा को पार करने वाला दस सिर वाला होगा। सरकार को चाहिए कि नो गो एरिया की लक्ष्मण रेखा को न पार करे। सरकार की भी मंशा होगी कि वह राम रूपी काम करे। उन्होंने आश्वासन दिया कि आदिवासियों की मांगों को पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजेंगे। सिंहदेव ने भरोसा जताया कि जाजय मांगों पर सरकार सुन-समझकर निर्णय लेगी।
यह है हसदेव संघर्ष समिति की मांग
हसदेव अरण्य संघर्ष समिति के उमेश्वर सिंह अर्मो, रामलाल करियाम, बसंती दीवान, बजरंग पैकरा और आलोक शुक्ला ने मांग की कि हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त कोयला खनन परियोजनाओं को निरस्त किया जाए। बिना ग्राम सभा सहमति के कोल बेयरिंग एक्ट 1957 के तहत किए गए सभी भूमि-अधिग्रहण को तत्काल निरस्त किया जाए। पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी कानून से भूमि-अधिग्रहण प्रक्रिया के पूर्व ग्राम सभा से अनिवार्य सहमति लेने के प्रावधान को लागू किया जाए।
परसा कोल ब्लाक के लिए फर्जी प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई वन स्वीकृति को तत्काल निरस्त किया जाए। ग्राम सभा का फर्जी प्रस्ताव बनाने वाले अधिकारी और कंपनी पर एफआइआर दर्ज किया जाए। घाटबर्रा के निरस्त सामुदायिक वनाधिकार को बहाल करते हुए सभी गांव में सामुदायिक वन संसाधन और व्यक्तिगत वन अधिकारों को मान्यता दी जाए।
विकास में बाधा डालने वाले एनजीओ पर लगे प्रतिबंध
उदयपुर के ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विकास में अड़चन डालने वाले एनजीओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने सरगुजा कलेक्टर को एक पत्र के माध्यम से बताया कि छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन एवं हसदेव अरण्य संघर्ष समिती जैसे तथाकथित एनजीओ उनके क्षेत्र के सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ते हुए विकास में बाधा डालते है। दोनों एनजीओ पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए। पत्र में कहा कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित परसा केंते कोयला खदान के विकास और संचालन का कार्य 10 वर्षों से किया जा रहा है।
इससे हजारों स्थानीय युवाओं और व्यक्तियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कौशल विकास के साथ साथ क्षेत्र की महिलाओं के लिए महिला उद्यमी बहुउद्देशीय सहकारी समिति का संचालन से क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो रहा है।

