जबलपुर। अदालत ने तल्ख टिप्पणी में कहा कि किसी मासूम से अप्राकृतिक कृत्य जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। इस तरह के संगीन मामले में किसी तरह की नरमी बरते जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐसे आरोपितों की असली जगह जेल ही है। इनका समाज में खुला घूमना ठीक नहीं है। सजा भुगतने के बाद ही इनकी आत्मा सही दिशा में व्यवहार के लिए प्रेरित कर सकती है। इस मत के साथ विशेष न्यायाधीश ज्योति मिश्रा की अदालत ने मासूम बालक के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने के आरोपित गोरखपुर निवासी वीरू बर्मन का दोष सिद्ध होने पर 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाईं। साथ ही साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 21 जुलाई, 2019 को दोपहर साढ़े तीन बजे वीरू बर्मन ने उसके मासूम बालक के साथ अप्राकृतिक कृत्य किया। इसके बाद बालक को बहला-फुसला कर अपने घर ले गया, जहां पर उसने बालक को जान से मारने की धमकी दी। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 377, 363, 506 भादवि व धारा 5/6 का मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। जिला लोक अभियोजन अधिकारी अजय जैन ने मामले में 11 साक्षियों के बयान कराए। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपित को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। लोक अभियोजन संचालक-महानिदेशक के निर्देशन में अभियोजन की ओर से अजय जैन, जिला लोक अभियोजन अधिकारी के द्वारा मामले में पैरवी की गई।

