बिलासपुर। रेडी टू ईट पोषण आहर वितरण के लिए समूहों के चयन में गड़बड़ी को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य शासन सहित अन्य पक्षकारों को जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। दुर्ग जिले में महिला बाल विकास विभाग द्वारा अहिवारा के कुम्हारी में रेटी टू ईट पूरक पोषण आहार प्रदान करने के लिए 23 जनवरी 2021 को विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। इसके लिए महिला स्वसहायता समूहों से आवेदनपत्र मंगाए गए। कुम्हारी की तुलसी महिला स्व सहायता समूह ने भी इसके लिए आवेदन पत्र जमा किया था। कार्यक्रम अधिकारी द्वारा गठित जिला स्तरीय चयन समिति ने सात जून 2021 को सूची जारी की। इस सूची में योग्य समूह को बाहर कर अयोग्य समूह को शामिल कर लिया गया। इसमें अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए तुलसी स्वसहायता समूह ने अधिवक्ता समीर बेहार के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में जारी सूची को चुनौती दी गई है। साथ ही कहा है कि याचिकाकर्ता समूह के पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं।
जिसे विधिवत रूप से आवेदन पत्र के साथ जमा किया गया था। फिर भी अवैध रूप से खामियां निकालकर समूह को जानबूझकर अलग कर दिया गया। जबकि, शिव शक्ति समूह को सूची में शामिल किया गया है। आरोप है कि उक्त समूह को शामिल करने के लिए ही याचिकाकर्ता समूह को जानबुझकर बाहर किया गया है। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश भर में इस तरह से मनमानी की जा रही है। वहीं, जिलों में अनुचित एवं अन्यायपूर्ण कार्य कर अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रकार का आचरण शासन द्वारा किया जा रहा है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि कार्यक्रम अधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता के पांच माह के बिल का सही तरीके से भुगतान भी नहीं किया गया है। इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य शासन व महिला बाल विकास के साथ ही शिव शक्ति महिला स्वसहायता समूह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

