रवि सेन/बागबाहरा। बिना लाइसेंस और प्रशासन की अनुमति के बिना भी होता है करोड़ों का कबाड़ कारोबार। इस कारोबार में किसी प्रशासकीय अमले का नहीं है नियंत्रण। बागबाहरा नगर में धड़ल्ले से फल-फूल रहा है कबाड़ का अवैध कारोबार। कबाड़ कारोबारी छोटे बच्चों को भी धंधे में लगा कर उन्हें धकेल रहे हैं अपराध की दुनिया में। नगर में एक दर्जन से भी अधिक कबाड़ के व्यवसायी हैं। जो साल में करोड़ों का कारोबार करते हैं।
नगर में इन दिनों धड़ल्ले से कबाड़ियों का अवैध कारोबार चल रहा है। इस व्यवसाय को करने के लिए न तो किसी को लाइसेंस की जरूरत होती है और न ही किसी की अनुमति की आवश्यकता होती है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सिर्फ एक स्टाक रजिस्टर की जरूरत होती है। स्टॉक रजिस्टर में खरीद-बिक्री किए गए समान को दर्ज कर इस व्यवसाय को आसानी से किया जा सकता है। इस व्यवसाय में पुलिस और प्रशासन का कोई रोकटोक नहीं होता है।
मजेदार बात यह कि नगर में एक दर्जन से भी अधिक कबाड़ के व्यवसायी हैं। जो बेरोकटोक व बेखौफ कारोबार कर रहे हैं। इन पर किसी का नियंत्रण नहीं होने से नगर में दिन ब दिन कबाडिय़ों की संख्या में बढ़ती जा रही है। कबाड़ी बिना सत्यापन के साइकिल, मोटरसाइकिल एवं अन्य चोरियों के समाना को बेधड़क खरीद रहे हैं। इस व्यवसाय में अन्य प्रदेश से आए लोग काफी सक्रिय हैं। उनके द्वारा ही नगर में इस व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है। आलम यह है कि पुलिस कबाडिय़ों पर नकेल नहीं कस पा रही है। कभी कभार ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी की जाती है।
नगर तथा आसपास के गांवों में अक्सर मोबाइल टावर से बैट्री तथा साइकिल व बाइक चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। दिन-दहाड़े सार्वजनिक स्थानों से साइकिल और बाइक चोरी हो जाती है। साइकिल चोरी होने पर अमूमन लोग थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते, क्योंकि पुलिस इसे छोटा मामला बताकर ध्यान नहीं देती। बाइक और बैट्री चोरी की रिपोर्ट तो लिखी जाती है, लेकिन अक्सर ये वापस नहीं मिलते। इसका कारण यह है कि चोरी की साइकिल और बाइक के कलपुर्जे को अलग-अलग कर कबाड़ में तब्दील कर दिया जाता है। इसके अलावा इस धंधे में लोहे के सामान व घरेलू उपयोग के सामान सहित कई कीमती समान पानी के मोल कबाड़ी अपने दलालों के माध्यम से खरीद कर करोड़ों कमाते है।
बिना लाइसेंस के चल रहा करोड़ों का धंधा
कबाड़ व्यवसाय के लिए शासन ने कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाया है, पर इसके लिए लाइसेंस जरूरी है। नियम के मुताबिक कबाड़ के व्यवसाय के लिए लाइसेंस बना होना चाहिए। नगर में संचालित कबाड़ के दुकानदारों के हैं पास कोई लाइसेंस है या नही यह जांच का विषय है। कबाड़ दुकानदारोंके पास खरीदी-बिक्री की कोई रसीद भी नहीं होती। हालांकि बागबाहरा औद्योगिक क्षेत्र नहीं होने के बावजूद यहां कबाड़ का बहुत बड़ा व्यवसाय होता।
धंधे में बच्चे भी
कई मामले ऐसे भी आए हैं, जिनमें कबाड़ी बच्चों से चोरी के माल खरीदते हैं। वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किशोरों को चोरी करने के लिए प्रेरित करते हैं। ये किशोर प्राय: गरीब तबके के होते हैं। पारिवारिक व सामाजिक मार्गदर्शन नहीं मिलने से वे घरों के आसपास फेंके गए कचरे में से कबाड़ चुनते हैं बाद में इन बच्चों पर पारिवारिक नियंत्रण नहीं होने के कारण नशे के गिरफ्त में आ जाते है और अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए चोरी के धंधे में उतर आते है।
कबाड़ व्यवसायियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं
कबाड़ का व्यवसाय करने वालों के खिलाफ पुलिस के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं करने से इनके हौसले बुलंद हो गए हैं और ये बेधड़क चोरी के सामानों की खरीद बिक्री के काम में लगे हुए हैं। यदि पुलिस के द्वारा ऐसे व्यवासियों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो नगर तथा आसपास के गांवों में चोरी हुए कई समान इनके पास से बरामद हो सकता है। यहां के कबाड़ियों के पास ज्यादातर भवन निर्माण में उपयोग होने वाले छड़,वाहनों के चक्के एवं अन्य सामाग्री आसानी से बरामद किया जा सकता है।

