रायपुर : भाजपा के बस्तर चिंतन शिविर को लेकर भले ही यह कहा जाता हो कि इसमें पूरे प्रदेश की आगामी रणनीति तैयार हो रही है, मगर इसका बड़ा मकसद बस्तर गढ़ को पुन: वापस पाना है। यही वजह है कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष को बस्तर भेजा है। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी और सह प्रभारी नितिन नबीन को आदिवासी नेताओं की बातें सुनने, समझने और इन्हें संगठित कर एक मंच पर लाने जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा का लक्ष्य 2023 के चुनाव में 12 में से ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने का है। बस्तर में अभी तो भाजपा का खाता तक नहीं खुला है। उधर, ‘पत्रिका’ ने इस दौरान कई नेताओं से बात की। इन्होंने कहा कि साउंड प्रूफ बंद कमरे में पौने तीन साल में पहली बार इस प्रकार खुलकर अपनी बात रख पा रहे हैं। गौरतलब है कि भाजपा ने 2003 में बस्तर से ही अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की थी, सत्ता में आई थी। संभव है कि आने वाले कुछ दिनों में पार्टी में संगठनात्मक तौर पर बड़े फेर-बदल भी दिखें। उधर, आगामी 1 साल की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है।
सबसे ज्यादा ताकत दिखाई एसटी मोर्चा ने
भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की 8 अगस्त को हुई पहली प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में सभी आदिवासी नेता एक मंच पर दिखे थे। भाजपा के 8 मोर्चा हैं, मगर किसी भी मोर्चा ने कार्यसमिति में इस प्रकार से ताकत का एहसास नहीं करवाया था। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह, केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उराव, पूर्व सांसद नंदकुमार साय, समेत सभी बड़े चेहरे मौजूद थे।
सीटों का गणित समझें
छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल्य राज्य है। यहां की कुल 90 विधानसभा सीटों में से 29 सीट आदिवासी हैं। इनमें अकेले बस्तर संभाग में 12 सीटें हैं, जिनमें 1 को छोड़ शेष 11 आदिवासी सीटें हैं। हमेशा से भाजपा के लिए आदिवासी सीटें निर्णायक रही हैं। मगर, 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 11 सीटें जीतकर भाजपा का पूरा गणित ही बिगाड़ दिया था। बाद में एक और सीट पर उपचुनाव हुआ, वह सीट भी कांग्रेस ने जीती।
बस्तर में कुल 12 सीट
2008 चुनाव- भाजपा 11, कांग्रेस 1
2013 चुनाव- कांग्रेस 08, भाजपा 4
2018 चुनाव- कांग्रेस 12, भाजपा 0

