बालकृष्ण मिश्रा/सुकमा : सुपोषित आहार ही स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है, हम जितना पौष्टिक और प्राकृतिक आहार ग्रहण करेगें उतना ही स्वस्थ और निरोग जीवन जीयेगें। इस खरीफ वर्ष सुकमा जिले के किसानों को अपने खेतों में पोषण से भरपूर जिंक राइस की फसल लेने के लिए प्रेरित करने हेतु कृषि विज्ञान केन्दग सुकमा द्वारा चयनित ग्राम पुजारीपाल और चिपुरपाल के कृषकों को जिंक राइस के रोपण और उचित देखभाल का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के तौर पर कतार विधि द्वारा लगाने हेतु नर्सरी तैयार किया गया एवं पौध रोपण से पहले फास्फोरस घुलनशील जीवाणु, पोटेशियम घुलनशील जीवाणु तथा ऐजेटोबेक्टर द्वारा जड़ उपचार हेतु प्रशिक्षण दिया गया। किसानों तक यह बीज आसानी से पहुंच सके, इसके लिए रायपुर से बीज लाकर कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा के वैज्ञानिकों द्वारा जिले के इच्छुक कृषकों को उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिंक राइस-1 है पोषण से भरपूर
हमारे खान-पान में पोषक तत्वों की काफी कमी है जिसमें जिंक का हमारे पोषण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसकी कमी के कारण बच्चे में प्रायः कुपोषण की समस्या देखा गया है इसके साथ साथ उम्र के अनुसार दिमाग का विकास न होना, हड्डियों पर असर पड़ना सहित कई प्रकार की बीमारियां होती हैं। एैसे में जिंक राइस का सेवन से सबसे ज्यादा फायदा बच्चों और गर्भवती महिलाओं को होगा। इसमें जिंक की मात्रा प्रति सौ ग्राम में 22 से 24 माइक्रोग्राम होता है। जबकि सामान्य चावल में 14 से 16 माइक्रोग्राम जिंक होता है जो कि सामान्य धान से 8 माइक्रोग्राम अधिक है। चावल को खाने से शरीर में जिंक की कमी दूर होती है। इसके साथ ही यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
केवल 110 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गइ चावल की नई किस्म जिंक राइस-1 केवल 110 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादकता 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। इसकी ऊंचाई 95-100 सेमी होती है। यदि किसान प्रतिवर्ष इसी प्रकार इन जैविक उर्वरकों का प्रयोग करेंगे तो उन्हें रासायनिक उर्वरकों पर कम निर्भर रहना पडे़गा। कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा का उद्देश्य लोगों में जिंक की कमी को दूर करने के साथ साथ जिंक राइस धान के क्षे़़त्रफल को बढ़ाना है ।

