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रोप पर रोक कोरोनाकाल में नगर पालिका व कंपनी के बीच एग्रीमेंट खत्म, इधर हादसें के बाद विपक्षी ट्रस्टियों ने कोर्ट से लगा दिया रोक

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तिलकराम मंडावी/डोंगरगढ़ : कोरोना की दूसरी लहर के बाद मां बम्लेष्वरी का दरबार कोरोना प्रोटोकाॅल के साथ दर्षनार्थियों के लिए खुल चुका है। लेकिन रोप-वे की सुविधा से वंचित है। नगर पालिका व मां बम्लेष्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति का रोप-वे अलग-अलग कारणों से बंद है। गुड्स ट्राॅली में हादसें के बाद ट्रस्ट का रोप-वे बंद है। क्योंकि हादसें के बाद विपक्षी ट्रस्टियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर चालू करानें पर रोक लगा रखा है। वहीं 2020 में नगर पालिका व रोप-वे कंपनी के बीच संचालन को लेकर एग्रीमेंट खत्म हो गया। कोरोनाकाल को देखतें हुए कंपनी ने दोबारा संचालन करनें की इच्छा जाहिर नहीं की। वहीं नगर पालिका द्वारा संचालन को लेकर टेंडर मंगानें के बावजूद राजनीतिक कारणों से टेंडर नहीं हो पाया। जब तक नया एग्रीमेंट नहीं हो जाता तब तक नगर पालिका के रोप-वे संचालन को लेकर स्थिति साफ नहीं होगी। दो साल से नगर पालिका की आय में भी बुरा असर पड़ा है। इधर ट्रस्ट के नए रोप-वे भी विवादों में आनें से बंद है। इससें मां बम्लेष्वरी देवी के दर्षनार्थियों को उपर जानें के लिए सुविधा नहीं मिल पा रही है। उपर पहाड़ में जानें के लिए फिलहाल सीढ़ी ही एकमात्र विकल्प है। बताया जा रहा है कि टेक्निकल टीम के बिना संचालन का हवाला देकर विपक्षी ट्रस्टियों ने हाईकोर्ट से रोक लगाया है। ट्रस्ट समिति को टेक्निकल संबंधी सारें दस्तावेज कोर्ट में पेष करनें का आदेष जारी किया गया है।
जानिए, ट्रस्ट व पालिका के रोप-वे संचालन में क्या-क्या दिक्कतें
नगर पालिकाः कोरोना की पहली लहर के बीच ही नगर पालिका व रोप-वे कंपनी के बीच संचालन का एग्रीमेंट खत्म हुआ। स्थिति सामान्य हुई तो पालिका ने दोबारा टेंडर मंगाया। सत्ता से जुड़े लोगों ने संचालन करनें के लिए उठापटक की। लेकिन विवादों व राजनीतिक कारणों से बात नहीं बनी। बता दें कि रोप-वे संचालन के लिए अनुभव, टेक्निकल टीम का होना आवष्यक है। लेकिन दुर्ग के ठेकेदार के पास रोप-वे संचालन का अनुभव नहीं होनें व टेक्निकल टीम नहीं होनें के बावजूद टेंडर डाला गया था। जिससें कई पार्शदों ने आपत्ति भी की थी।
मंदिर ट्रस्टः मां बम्लेष्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के नए रोप-वे का संचालन कब से षुरू होगा इसे लेकर संषय बना हुआ है। क्योंकि हादसें के बाद विपक्षी ट्रस्टियों ने कोर्ट से रोक लगा दिया है। विपक्ष के रोक के बाद सत्ताधारी पदाधिकारी टेक्निकल टीम की जानकारी कोर्ट में पेष करनें जा रहे है। अध्यक्ष नारायण अग्रवाल का कहना है कि संचालन निर्माण करनें वाली कंपनी ही कर रही थी। हम तो केवल माॅनीटरिंग कर रहे थे। इसलिए कंपनी के पास टेक्निकल टीम का अनुभव है और इससे संबंधित दस्तावेज कोर्ट में जमा कर दिया गया है।
रोप-वे बंद होनें से पालिका की आय में सीधा प्रभाव- सालों से नगर पालिका के राजस्व को मजबूत करनें में रोप-वे की आय का प्रमुख योगदान रहा है। हर माह कर्मचारियों को वेतन देनें में पालिका को मदद मिलती थी। कोरोनाकाल से बंद होनें के चलतें कई महीनों तक कर्मचारियों को वेतन देनें के लाले पड़े। नगर पालिका को हर माह लाखों रूपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन इस ओर अब तक पहल नहीं की गई है। नगर पालिका ने दोबारा टेंडर नहीं मंगाया है।
सीढ़ी से जा रहे दर्षनार्थी, दिव्यांगों व बुजुर्ग नहीं जा पा रहे- रोप-वे बंद होनें की वजह से दर्षनार्थियों को पैदल सीढ़ी के रास्तें उपर मंदिर जाना पड़ रहा है। जबकि दिव्यांग व बुजुर्ग पैदल नहीं जा पा रहे है। मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार 2 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इसके बाद ही नए रोप-वे के दोबारा षुरू होनें की स्थिति साफ होगी। विपक्षी ट्रस्टियों के आरोप के मुताबिक ट्रस्ट समिति को टेक्निकल टीम के साथ संचालन करना है। गुड्स ट्राॅली टूटनें के बाद चार पदाधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस डोंगरगढ़ थाना में दर्ज हुआ है।
जानिए, क्या कहतें है संस्थाओं के जिम्मेदार
हमनें सारें दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए
विपक्षी ट्रस्टियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाया है कि रोप-वे का संचालन बिना टेक्निकल टीम के किया जा रहा है। जबकि यह आरोप पूरी तरह से गलत है। क्योंकि रोप-वे का निर्माण करनें वाली कंपनी अनुभवी है और उनकी टेक्निकल टीम काम कर रही थी। ट्रस्ट का रोप-वे होनें से निगरानी व सहयोग की जवाबदारी हमारी है। हमनें संचालन संबंधी सारें दस्तावेज हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दिया है। बहुत जल्द सुनवाई के बाद संचालन षुरू कर दिया जाएगा।
नारायण अग्रवाल, अध्यक्ष मां बम्लेष्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति
सोमवार को होगा संचालन के लिए टेंडर
नगर पालिका के रोप-वे संचालन का एग्रीमेंट पिछलें साल ही खत्म हो गया था। सोमवार को फिर से नया टेंडर निकाला जाएगा। अनुभवी व टेक्निकल टीम के फर्म को ही गाइड-लाइन का पालन करतें हुए संचालन की जवाबदारी दी जाएगी। संचालन को लेकर किसी तरह का समझौता बिलकुल नहीं होगा।

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