अक्कू रिजवी/कांकेर : जब से रोशन कौशिक कांकेर जिला यातायात प्रभारी के पद पर हैं ,उन्हें ऐसी- ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जिस विषय में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा, जैसे दूध नदी के पुल पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा, जिसके कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति हो जाती है। कई बार बड़ी- बड़ी दुर्घटनाएं भी हुई हैं जिनमें जान माल का नुकसान भी हुआ है। ज्ञातव्य है कि दूध नदी का पुल शहर के बीचो-बीच से जाने वाले नेशनल हाईवे 30 पर स्थित है और थाने के कुछ ही दूर शहर के मध्य में ही है। इस पुल का कोई नजदीकी वैकल्पिक मार्ग नहीं है। इसलिए नेशनल हाईवे से गुज़रने वाली हर गाड़ी की मजबूरी है कि उसे दूध नदी पुल से ही गुज़रना पड़ता है अन्यथा बहुत लंबा चक्कर लगाकर पंडरीपानी से जाना पड़ता है। मुश्किल की बात यह है कि इसी सकरे पुल के दोनों किनारों पर आवारा मवेशी अपनी आरामगाह बनाए बड़े आराम से बैठे रहते हैं और किसी के हटाने से नहीं हटते। वे तभी हटते हैं, जब उन्हें पुलिस की मार पड़ती है। यातायात में सबसे बड़ी बाधा आजकल इन मवेशियों के कारण ही उत्पन्न हो रही है। जिससे निपटने के लिए यातायात प्रभारी ने कल शाम से एक विशेष अभियान प्रारंभ कर दिया है जिसके तहत कुछ सिपाहियों की ड्यूटी पुल पर ही लगा दी गई है जो आवारा मवेशियों को भगाकर नेशनल हाईवे को सुरक्षित करते रहेंगे, जिससे मवेशियों के अलावा लोगों की भी जान बचेगी तथा वाहनों को भी जाम नहीं लगाना पड़ेगा। यातायात पुलिस की इस विशेष मुहिम का लोगों ने स्वागत किया है और चर्चा है कि रोशन कौशिक पहले यातायात प्रभारी हैं जिन्होंने दूध नदी पुल पर मवेशियों के जमावड़े की समस्या को गंभीरता से लिया है तथा उसके खिलाफ़ अभियान भी शुरू कर चुके हैं।
कांकेर की दूध नदी के पुल में बैठे आवारा मवेशियों को यातायात पुलिस ने हटाया

