भानुप्रतापपुर। दूसरों की काबिज भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कराने के मामले में नगर पंचायत भानुप्रतापपुर पहले भी सुर्खियों में रही है। कुछ माह पूर्व बसन्त नगर के समीप सागौन प्लांटेशन के किनारे वर्षों से कास्त कर रहे गरीब आदिवासी परिवार की भूमि पर जबरन गौठान का निर्माण कराया गया जिसका काफी विरोध हुआ। अब वैसे ही नगर के वार्ड क्रमांक 4 में बिजली ऑफिस के सामने निकाय एवं पार्षद निधि से काम्पलेक्स व यात्री प्रतीक्षालय सह मूत्रालय के निर्माण किये जाने हेतु निविदा निकाली गई है। निविदा निकाले जाने के बाद से ही उस भूमि पर कब्जाधारी लोगों द्वारा कलेक्टर कार्यालय, एसडीएम कार्यालय एवं नगर पंचायत कार्यालय में ज्ञापन देकर विरोध दर्ज किया व निविदा निरस्त करने की मांग की गयी हैं।
ज्ञात हो कि नगर पंचायत भानुप्रतापपुर अतिक्रमण के मामलो में हमेशा ही चर्चा में रहा है। यहाँ अमीर व रसूखदार लोग नेताओं के संरक्षण में बेसकीमती भूमि पर कब्जा कर बड़े बड़े भवन बना लेते है और उसे ऊंचे दामों पर बेच देते हैं या तो किराये पर चढ़ा कर जीवनभर लाभ कमाते हैं। वहीं कोई गरीब या ज़रूरतमंद व्यक्ति यदि कहीं कब्जा करे या वर्षों से कब्जा की गई भूमि पर निर्माण कराना चाहे तो वही नेता उनके विरोध में उतर जाते हैं। जाहिर है गरीबों से उन नेताओं को कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता होगा इसलिए उनके मकानों को हटवा दिया जाता है।
नगर के दल्ली रोड पर बिजली ऑफिस के सामने की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा वर्षो से कब्जा किया गया है। इनमें जो सक्षम व रसूखदार हैं उनके पक्के दुकान बन गए और कुछ ने किसी और को वह भूमि बेच दी। पर जो वहाँ झोपड़ी बनाकर या ठेला लगाकर अपना जीविकोपार्जन कर रहा है उसे दुकान बनाने ही नहीं दिया जा रहा है, और अब उनकी कब्जाधारी भूमि पर जबरन नगर पंचायत द्वारा काम्पलेक्स व यात्री प्रतीक्षालय सह मूत्रालय का निर्माण कराने निविदा निकाली गयी है। उक्त भूमि राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं है और दूसरे के कब्जे में हैं उसके बावजूद नगर पंचायत द्वारा वहाँ निर्माण कराने की निविदा जारी की गई जो समझ से परे है।
पार्षद की भूमिका भी संदेहास्पद
नगर पंचायत में वार्ड पार्षद का अहम रोल होता है। उनके वार्ड में बिना सहमति लिए कोई कार्य नहीं किया जाता। पर वर्षों से काबिज लोगों की भूमि पर नगर पंचायत द्वारा निर्माण किये जाने को लेकर पार्षद ने कोई आपत्ति नहीं कि वहीं स्वंय पार्षद निधि देकर वहां मूत्रालय व प्रतिक्षालय बनाने का प्रस्ताव दे दिया। जबकि उस स्थान के बिल्कुल पास ही एक दुर्गा माता का मंदिर है और सड़क की दूसरी ओर पहले ही प्रतीक्षालय बना हुआ है। इतना ही नहीं वहाँ अन्य कुछ दुकाने जो लॉकडाउन का फायदा उठाकर बनाई गई हैं उनको पार्षद द्वारा पूरा संरक्षण दिया जा रहा है क्योंकि वे अमीरों व रसूखदारों की है जबकि गरीब की झोपड़ी को हटाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। इसके पहले भी नगर में अतिक्रमण कराने के मामले में पार्षद का नाम सामने आ चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी से यह भी पता चला है कि पार्षद द्वारा कई जगहों पर कब्जा कर मकान बनाने व भूमि की खरीद फरोख्त के कार्य में भी संलिप्त रह चुकी है।
मंदिर के पास नहीं बनने देंगे मूत्रालय
वार्ड 4 के निवासी एवं ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष श्याम शुक्ला ने कहा कि बिजली ऑफिस में वर्षों पुराना दुर्गा माता का मंदिर है जहाँ वार्ड के लोगों के अलावा पूरे नगर के लोगों की श्रद्धा है व हर नवरात्रि में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। उसके सामने मूत्रालय बनाना बेहद निंदनीय हैं। नगर पंचायत को हिंदुओ की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए भूमि चयन पर पुनर्विचार करना चाहिए। यदि वहाँ मूत्रालय बनाया जाएगा तो हिन्दू साथी वार्ड के लोगों के साथ मिलकर चक्काजाम करेंगें।

