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गरियाबंद आदिवासी विकास परियोजना के संजय नेताम बने अध्यक्ष

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किरीट ठक्कर/गरियाबंद। बिंद्रानवागढ़ विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी रहे संजय नेताम को गरियाबंद आदिवासी एकीकृत परियोजना का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। वैसे संजय नेताम वर्तमान में जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 8 के जिला पंचायत सदस्य हैं साथ ही गरियाबंद जिला पंचायत के उपाध्यक्ष भी हैं।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पूर्व बिंद्रा नवागढ़ विधानसभा चुनाव के अवसर पर इन्हें बिंद्रा नवागढ़ विधानसभा के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा था किंतु कुछ हजार के वोटों से प्रास्त हो गए दरसल पहली बार चुनाव लड़ना और एकाएक प्रत्याशी घोषित होने से वे अपनी समुचित तैयारी नहीं कर पाए थे अपनी हार के बाद वे लगातार बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र का दौरा कर वहां की समस्याओं को ले कर लगातार दौरा करते रहे है। आज भी बिंद्रानवगढ़ क्षेत्र के जानता के लिए छाया विधायक के रुप में कार्यरत है । और गांव गांव पहुंचकर जनसंपर्क का दायरा विस्तृत कर रहे हैं इसी दौरान राज्य शासन के द्वारा गरियाबंद एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के अध्यक्ष पद हेतु नाम अंकित का दौर चला जिस पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के के निर्णय के अनुरूप आज उनको गरियाबंद जिला एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। उनके मनोनयन पर जहां जहां प्रदेश जिला और ब्लाक के पदाधिकारियों ने उन्हें बधाई दी है जिनमे राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अंतर्गत जहां दक्षिण बस्तर परियोजना के लिए विधायक देवबती कर्मा को नियुक्त किया गया है, वहीं गरियाबंद आदिवासी परियोजना के लिए संजय नेताम को राज्य शासन ने अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया है।
इन्होंने दी बधाई 
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भावसिंह साहू,उपाध्यक्ष तपेश्वर ठाकुर, महामंत्री मनोज मिश्रा,  ,भोला जगत मैनपुर, भूपेंद्र मांझी देवभोग, श्रीमती ललिता यादव अमलीपदर ,युवा नेता अल्तमस खान ,तनवीर राजपूत, सुरेश मानिकपुरी, जिले के वरिष्ठ कांग्रेस जन, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्य, एवं सामाजिक नेताओं ने संजय नेताम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।
आदिवासियों की उन्नति और विकास ही मेरा प्रमुख लक्ष्य होगा.. संजय नेताम
संजय नेताम ने कहा कि वह पूरी ताकत से आदिवासियों के विकास के लिए इस परियोजना के माध्यम से जुड़ जाएंगे शासन से अधिक से अधिक राशि लाकर आदिवासी समुदाय के विकास की योजना तैयार कर उन्हें लाभान्वित करना उनका प्रमुख उद्देश्य होगा जिससे आदिवासियों का जनजीवन में व्यापक सुधार आए वे काफी समय से इन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिसके चलते क्षेत्रीय समस्याओं का उन्हें पूरी तरह ज्ञान है और इन समस्याओं से निराकरण ही उनका प्रमुख उद्देश्य होगा ।
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