किरीट ठक्कर/गरियाबंद । जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भूमाफियाओं द्वारा किये जा रहे जमीन की अवैध प्लाटिंग के मामले में कोई कार्यवाही ना होना अनेक संदेहों को जन्म दे रहा है। अब इस मामले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार जीवन एस साहू द्वारा सोमवार कलेक्टर निलेश क्षीरसागर से मुलाकात कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम शिकायत का आवेदन सौंपा गया है।
नगर के नजदीकी ग्राम पंचायत आमदी म के पूर्व उपसरपंच तथा वर्तमान पंच व वरिष्ठ पत्रकार जीवन एस साहू ने आमदी म में कृषि भूमि की अवैध प्लाटिंग को लेकर सवाल खड़े किये है साथ ही जिला प्रशासन को पहले भी कार्यवाही हेतु शिकायती पत्र दिया है। जीवन एस साहू ने अपनी उपस्थिति में जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने ने बताया कि कलेक्टर ने कहा है कि जांच भी होगी और कार्यवाही भी की जाएगी।
जीवन एस साहू ने आरोप लगाया है कि जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत आमदी (म) पंचायत अंतर्गत वार्ड क्रमांक 7 में स्थित कृषि भूमि में गरियाबंद निवासी हनीफ मेमन पिता अब्दुल हमीद मेमन द्वारा अवैध ढंग से भूमि प्लाटिंग कर धड़ल्ले से बिक्री किया जा रहा है, जो कि अवैधानिक है। इसके पूर्व भी उक्त भू – माफिया द्वारा ग्राम पंचायत केशोडार और पारागांव में अवैधानिक तरीके से प्लाटिंग कर कई टुकड़ों में जमीनों को बेचा गया है। बिक्री की गई जमीन का काइलोनाइजर लायसेंस नही है। पूर्व में उनके द्वारा कार्यवाही करने के लिए अपर कलेक्टर को आवेदन दिया गया था। जिस पर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश एसडीएम को दिये गये थे। एक वर्ष बाद भी इसमें कोई भी जांच या कार्यवाही नही की गई है , जिससे इस प्रकार के अवैध कार्यों को बढ़ावा मिल रहा है।
ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत आमदी (म) पंच व वरिष्ठ पत्रकार जीवन एस साहू ने इस पर आपत्ति जताते हुये कहा है कि पूर्व में भी ग्राम आमदी म के वार्ड नंबर 07 में खसरा नंबर 491/1 रकबा 0.4900 हेक्टेयर कृषि भूमि जो कि मो. हनीफ मेमन पिता मो.हमीद मेमन साकिन गरियाबंद के नाम पर है। उक्त कृषि भूमि को कई टुकड़ों में प्लाटिंग कर अलग-अलग कई लोगों के पास बेचे जाने का कारोबार किया गया है। इस मामले पर कार्यवाही एवं रोक लगाये जाने की मांग की गई है ।
उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत आमदी म के अतिरिक्त मजरकट्टा पारागांव डोंगरीगांव कोकड़ी जैसे नगर के नजदीकी गांवो में अवैध प्लाटिंग का धंधा काफी अर्से से जारी है , किंतु प्रशासनिक कार्यवाही कहीं नजर नहीं आ रही है। इस तरह के अवैधानिक जमीन के कारोबार में अनेक लोग सक्रिय हैं। मीडिया में खबरें भी प्रमुखता से प्रकाशित हो रही है। इसके बावजूद प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगना समझ से परे है। खासकर जिला बनने के बाद कृषि भूमि में अवैध प्लाटिंग की जांच किये जाने से इसका खुलासा हो सकेगा, कि पहले किसकी जमीन थी, भूमाफियाओं ने किन लोगों को कितने टुकड़ों में बेचा है। इसके सम्पूर्ण जांच से ही मामले का पटाक्षेप होगा।
विचारणीय है कि जिला मुख्यालय के नजदीक ही अवैध प्लाटिंग धड़ल्ले से किया जा रहा है। इससे आशंका बनी है कि बिना प्रशासन के संरक्षण से यह कार्य सम्भव नही हो सकता , या फिर भूमाफियाओं के साथ राजस्व विभाग की जबरदस्त सेटिंग हो गई है। तभी तो बेख़ौफ़ होकर ऐसे कार्य किए जा रहे हैं। वर्षों से जमे हुये पटवारी आरआई तहसीलदार की भूमिका सन्देहप्रद है।


