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किडनी की बीमारी में क्या सहयोग कर सकता है जिले का स्वास्थ्य विभाग

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  • सीएमएचओ डॉ. एनआर नवरत्न दे रहे हैं जानकारी

किरीट ठक्कर/गरियाबंद। यही वो जिला है जहाँ के देवभोग ब्लॉक के गांव सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी को लेकर काफी हल्ला मचाया गया , शुरुवात में इस बीमारी के लिए सुपेबेड़ा में पीने के पानी को दोषी ठहराया जाता रहा , किन्तु गांव में उपलब्ध पानी के स्रोतों बोर आदि साथ ही भूमि ( मिट्टी ) का भी परीक्षण किया गया , किन्तु अब तक इस गांव में फैली किडनी की बीमारी का स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं हो सका है। चर्चा में कुछ लोगों का दावा है कि कुछ स्वार्थी तत्वों ने जानबूझकर अफवाह फैलाई , जबकि कुछ लोग इस बीमारी के लिए ओडिशा की पाउच शराब को दोषी ठहराते हैं। पीजीआई चंडीगढ़ और दिल्ली के किडनी रोग विशेषज्ञों की टीम भी किसी निष्कर्ष पर नही पहुंच सकी है। सीएमएचओ डॉ नवरतन के अनुसार जिला , ब्लॉक एवं प्रदेश स्तर पर चयनित स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सुपेबेड़ा के ग्रामीणों की समस्या व गंभीर किडनी की बीमारी को समझने आंध्र प्रदेश के एक ऐसे ही गांव का दौरा किया है। विशेषज्ञों ने इस गांव के रहन सहन खान पान को समझने का काफी प्रयास किया किन्तु किसी निष्कर्ष पर नही पहुंचा जा सका है।
मामला चाहे जो भी हो, किन्तु सुपेबेड़ा के अलावा भी जिले में किडनी के मरीजों की संख्या बढ़ ही रही है , मरीजों को डायलिसिस के लिए राजधानी रायपुर जाना पड़ता है। बीमारी से पीड़ित व्यक्ति , आने जाने के खर्च से भी परेशान हो जाता है।
इस संबंध में जिले के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर नवरत्न का कहना है कि सुपेबेड़ा प्रकरण के समय ही हमने राज्य शासन से जिला चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट की मांग की है। राज्य शासन द्वारा इसकी स्वीकृति के बाद ही यहाँ के मरीजों को इसकी सुविधा मिल पायेगी। वर्तमान में हमारे पास यदि डायलिसिस पेशेंट की जानकारी होती है तो उसे हम राज्य शासन से कोआर्डिनेट कर डीके सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल रायपुर उपचार के लिए भेजते हैं।

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