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राहत भरी खबर : भारत ने बनाई कोरोना की दवा, डीआरडीओ की दवा को मंजूरी

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  • इससे मरीज जल्दी रिकवर होते हैं; ऑक्सीजन की जरूरत भी कम होती है

नई दिल्ली। कोरोना से जारी लड़ाई के खिलाफ एक राहत भरी खबर आई है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने शनिवार को ड्रग 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) दवा से कोरोना के इलाज को इमरजेंसी अप्रुवल दे दिया है। कोरोना संक्रमित मरीज के लिए यह एक वैकल्पिक इलाज होगा। जिन मरीजों पर इस दवा का इस्तेमाल किया गया, उनकी आरटी पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई।
ये दवा कोरोना मरीजों में संक्रमण की ग्रोथ रोककर उन्हें तेजी से रिकवर करने में मदद करती है। 2-डीजी दवा को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी की मदद से तैयार किया है। शुरुआती ट्रायल में पता चला है कि इससे मरीज के ऑक्सीजन लेवल में भी सुधार होता है। 2-डीजी दवा लेने वाले मरीजों में धीरे-धीरे इस तरह से संक्रमण कम होते गए।
17 अस्पतालों में 110 मरीजों पर दूसरे फेज का ट्रायल
डीजीसीआई ने मई 2020 में कोरोना मरीजों पर 2-डीजी का दूसरे फेज का क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया था। अक्टूबर 2020 तक चले ट्रायल में दवा 2-डीजी को सुरक्षित पाया गया। इससे कोरोना मरीजों को तेजी से रिकवर होने में मदद मिली।
फेज-2 ट्रायल ्र और ए और बी फेज में किया गया। इनमें 110 कोरोना मरीजों को शामिल किया गया। फेज-2्र में 6 अस्पतालों के मरीज शामिल थे, जबकि फेज-2 बी में 11 अस्पतालों के मरीज शामिल हुए।
220 मरीजों पर किया तीसरे फेज का ट्रायल
दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक 220 कोरोना मरीजों पर तीसरे फेज का ट्रायल किया गया। ये ट्रायल दिल्ली, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के 27 अस्पतालों में किया गया। ट्रायल के दौरान तीसरे दिन मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता 42 प्रश से घटकर 31प्रश हो गई। खास बात यह है कि 65 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों पर भी दवा का पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिखा। 2-डीजी की दवा लेने वाले मरीजों की रिकवरी तेजी से होती है।
2-ष्ठत्र दवा लेने वाले मरीजों की रिकवरी तेजी से होती है।

अप्रैल 2020 में, कोविड -19 महामारी की पहली लहर के दौरान, आईएनएमएस-डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने हैदराबाद की सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) की मदद से 2-डीजी को लैब में टेस्ट किया। स्टेंडर्ड ऑफ केयर (एसओसी) मानक से तुलना करें तो दवा लेने वाले मरीज दूसरे मरीजों से ढाई दिन पहले ठीक हो गए।
पानी में घोलकर दी जाती है दवा-
दवा पाउडर के रूप में मिलती है। इसे पानी में घोलकर मरीज को पिलाना होता है। ये दवा सीधे उन कोशिकाओं तक पहुंचती है जहां संक्रमण होता है और वायरस को बढऩे से रोक देती है। लैब टेस्टिंग में पता चला कि ये कोरोना वायरस के खिलाफ काफी प्रभावी है। डीआरडीओ ने बयान जारी कर कहा है कि इसका उत्पादन भारी मात्रा में आसानी से किया जा सकता है।ऑक्सीजन की भी व्यवस्था की गई है ताकि जरूरतमंदों के लिए समय पर तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।होरा ने प्रदेश की जनता से बार-बार अपील की है कि कोरोना महामारी के इस जंग में जीत के लिए वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है और इसके साथ ही कोरोना से बचाव के लिए संयमित होकर जीवन की दिनचर्या को चलाना आवश्यक है।

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