- जंगल मे नदी नाले पोखर सब सुख चुके है पानी नही मिलने के कारण काल के गाल में शमा रहे है जंगली जानवर
यामिनी चंद्राकर/छुरा : गरियाबंद वनमण्डल के वनपरिक्षेत्र छुरा के नवाडीह के जंगल मे जिस बीमार मादा भालू को वन विभाग ने इलाज के बाद 21 अप्रैल को नवाडीह के जंगल मे छोड़ा था आज 08 दिन बाद मादा भालू का शव उसी जंगल मे छोड़े गये जगह से 100 मीटर की दूरी सुख चुके डबरी के किनारे मृत अवस्था मे मिला।इसकी जानकारी ग्रामीणों को तब मिली जब ग्रामीण सुबह जंगल की तरफ महुआ बिनने गए तब उन्होने देखा कि डबरी के पास एक भालू मृत पड़ा है जिसकी जानकारी ग्रामीणों द्वारा इलाके के फारेस्ट गार्ड यादराम सिन्हा को दी गई फारेस्ट गार्ड द्वारा इसकी जानकारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी छुरा को दी गई वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा इसकी जानकारी वनमण्डल अधिकारी को दी तब वनमण्डलाधिकारी ने गरियाबंद से वनविभाग के उपवनमण्डलाधिकारी मनोज चन्द्राकर के साथ पशु चिक्तिसक डॉ पंचभाई को भेजा डॉ पंचभाई द्वारा मृत भालू का पोस्टमार्टम किया गया जिसके बाद वनविभाग द्वारा मृत भालू को जलाया गया। ग़ौरतलब है कि 20 अप्रैल को नवाडीह के जंगल मे एक मादा भालू मुरचित अवस्था मे मिला था जिसे वनविभाग द्वारा रेस्क्यू कर पिंजरे में कैदकर वनपरिक्षेत्र कार्यालय छुरा लाकर जंगल सफारी से आये डॉ राकेश वर्मा द्वारा इलाज किया गया था डॉ राकेश वर्मा ने उस वक्त भी कहा था कि मादा भालू की यह स्थिति अत्याधिक गर्मी की वजह से हुई है। इससे यह बात भी साफ हो गई कि भालू की स्थिति पानी की कमी की वजह से हुई थी। वनविभाग के आला अधिकारी चाहे लाख दावे करे पर इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता कि जंगल के सारे नदी नाले व तालाब मार्च के महीने में ही सुख चुके है जिसके कारण वन्य जीव पानी की तालाश में गांव कि तरफ रुख कर रहे है। जंगली जानवरों को इस भीषण गर्मी में पानी मुहैया करवाने के मामले में वन अमला फ़िसड्डी साबित हो रही है। मादा भालू की मौत की सूचना मिलने के बाद हमारे संवाददाता द्वारा वनपरिक्षेत्र अधिकारी छुरा एस डी दीवान से सम्पर्क करने के लिए उनके मोबाइल फोन पर बार बार सम्पर्क करने के बाद भी उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नही समझा जिस यह प्रतीत होता है वन विभाग मृत मादा भालू का गुपचुप तरीके से पोस्टमार्टम करवा कर भालू को जलाने के फिराक में था। लेकिन मीडिया कर्मियों को ग्रामीणों से जानकारी मिलने पर मीडिया कर्मियों के घटना स्थल तक पहुचने तक मृत मादा भालू को आग के हवाले कर दिया गया था। बहरहाल जंगल मे पानी की कमी के चलते जानवरो का आकाल मौत मरना चिंता की विषय है वन्यजीव प्रेमियों ने इसे दुर्भाग्य बताते हुए कहा असमय मर रहे जानवर चिंता का विषय है विभाग जंगल मे जानवरो के लिए पानी की व्यवस्था पर ध्यान दे।

