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रायपुर नगर निगम ने किया शवों के अंतिम संस्कार का करार

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रायपुर: कोरोना से मौत की बढ़ती संख्या ने रायपुर नगर निगम को अंतिम संस्कार के लिए भी सरकारी ठेका जारी करने को बाध्य कर दिया है. राजधानी में हर रोज 50 से अधिक लोगों की कोरोना के कारण मौत हो रही है. परिजनों को कोरोना संक्रमित मरीजों की डेड बॉडी सौंपी नहीं जा रही है. इसलिए निगम के लिए अंतिम संस्कार बड़ी चुनौती बनी हुई है.

शवों के अंतिम संस्कार का करार

कोरोना महामारी ने रिश्तेदारों से मुखाग्नि तक का हक छीन लिया है. अधिकांश सरकारी विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं. इसकी वजह से कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार समय से नहीं हो पा रहा है. पीड़ित रिश्तेदारों की नाराजगी के बीच सरकारी ठेका जारी किया गया है. दस जोन में बंटे रायपुर नगर निगम के जोन पांच में 2.11 लाख रुपये में 50 शवों के अंतिम संस्कार का करार हुआ है. निगम की ओर से अंतिम संस्कार के लिए PPE किट और लकड़ी सहित सभी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है. जोन दो का ठेका सोमवार तक हो जाने की उम्मीद है. आपातकालिक स्थिति को देखते हुए सभी जोन में अलग-अलग ठेके दिए जाएंगे. प्रदेश में कोरोना संक्रमण से हर रोज 150 से 200 लोगों की मौत हो रही है. जिसमें ज्यादातर राजधानी के ही 50 से 70 शव होते हैं.

दो प्रकार के ठेके दिए जा रहे

रायपुर के जोन-पांच के कमिश्नर चंदन शर्मा ने बताया कि सरयूबांधा श्मशान घाट पर शवों को जलाने के लिए दो महीने का टेंडर जारी किया गया है. यहां रोजाना आठ से दस शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. अभी तक अनुबंधित कर्मचारी ही श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार कर रहे थे. ठेका जारी होने से पहले निगम की ओर से श्मशान घाटों पर अनुबंधित कर्मचारी तैनात किए गए थे. उन्हें 15 हजार रुपये प्रति माह की दर से भुगतान किया जा रहा था. कोरोना के मामले में प्रत्येक शव पर एक हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा था. नगर निगम में अपर आयुक्त ने कहा कि हमारी प्राथमिकता शवों का अंतिम संस्कार कराना है, जोन कमिश्नर अपने-अपने स्तर पर टेंडर देख रहे हैं.

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