- मितानिनव आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुंचेंगी घर-घर 15 से 22 मार्च तक
तापस सन्याल/दुर्ग। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रुप से 15 मार्च से 22 मार्च 2021 तक किया जाएगा। इस दौरान 1 वर्ष से 19 वर्ष तक 6.62 लाख बच्चों एवं किशोर/किशोरियों को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए कृमिनाशक एलबेंडाजोल गोली का सेवन कराया जाएगा। इस बार राज्य के 23 जिलों के कुल 87.94 लाख बच्चों को यह दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष बच्चों को मितानिन द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से अपने कार्यक्षेत्र के सभी घरों का भृमण कर कृमिनाशक दवा दी जाएगी। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 एमजी) चूर्ण बनाकर पानी के साथ, 2 से 3 वर्ष तक के बच्चों को 1 गोली पूरी तरह से चूर्ण बनाकर पानी के साथ तथा 4 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400एमजी) चबाकर के पानी के साथ सेवन कराया जाएगा । एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों और बड़ों के लिए सुरक्षित है। दवा खाने के उपरांत यदि कोई प्रतिकूल प्रभाव हो तो प्रबंधन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उपस्वास्थ्य केन्द्रों पर उपचार की व्यवस्था भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा रहेगी। कृमि मुक्ति दिवस पर बीमार बच्चों या पहले से कोई अन्य दवाई ले रहे बच्चों को एलबेंडाजोल की गोली नहीं दी जाएगी।
सीएमएचओ डॉ. गम्भीर सिंह ठाकुर ने बताया, “सरकार के निर्देशानुसार साल में 2 बार कृमि मुक्ति कार्यक्रम मनाया जाता है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग की भागीदारी होती है। कोविड-19 संक्रमण की व्यापकता को देखते हुए सितंबर-2020 में हुए कार्यक्रम के अनुसार इस चरण में भी कोविड-19 संबंधित दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा। जिन घरों में कोविड-19 के सक्रिय केस होंगे वहां सामान्य स्थिति होने के उपरांत दवा दी जाएगी। एलबेंडाजोल की गोली खिलाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व सैनिटाइजर का प्रयोग किया जाएगा”।
कृमि मुक्ति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सुदामा चंद्राकर ने बताया, “कृमि संक्रमण चक्र की रोकथाम के लिए यह गोली बच्चों को देना आवश्यक है। कृमि बच्चों के स्वास्थ्य शिक्षा और संपूर्ण विकास को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकते हैं। कृमिनाशक की गोली से बच्चों के संपूर्ण शारीरिक मानसिक विकास में मदद मिलती है। इसलिए कृमिनाशक गोली खिलाना आवश्यक है। जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिनों द्वारा घर-घर जा कर एलबेंडाजॉल की गोली 15 मार्च से खिलाई जाएगी। कृमि मुक्ति दिवस को सफल बनाने के लिए विकासखंड स्तर से प्रभारी अधिकारी सीडीपीओ, सेक्टर एमओ, पर्यवेक्षक, मितानिन समन्वयक, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिन को प्रशिक्षित किया गया है।
कृमि संक्रमण के लक्षण
कृमि संक्रमण पनपने से बच्चे के शरीर में खून की कमी हो जाती है। वे हमेशा थकान महसूस करते हैं उनका शारीरिक व मानसिक विकास भी बाधित होती है। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय
नाखून साफ और छोटे रखें, हमेशा साफ और स्वच्छ पानी ही पीऐं, खाने को ढककर रखें, साफ पानी में अच्छे से फल व सब्जियां धोएं, घरों के आस-पास साफ. सफाई रखें, खुले में शौच न करें हमेशा शौचालय का प्रयोग करें, अपने हाथ साबुन से धोए विशेष कर खाने से पहले और शौच जाने के बाद ।

