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तीन कृशि कानून को लेकर दी जानकारी, बताया- देषभर में कही भी किसान अपनी उपज ऑनलाइन मोड़ पर भी विक्रय कर सकते है

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तिलकराम मंडावी/ डोंगरगढ़। शासकीय नेहरू कॉलेज समकालीन विशय कृशि कानून विधेयक पर समूह चर्चा का आयोजन किया गया। विशय की महत्ता व प्रासंगिता को रेखांकित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. आरआर कोचे ने बताया कि कृशि ऐसा विशय है। जिसका संबंध प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सभी वर्गो के साथ है। भारत की बड़ी जनसंख्या जीवन-यापन के लिए कृशि पर आधारित है। इसके अतिरिक्त भारत की जीडीपी में भी कृशि का लगभग 15 प्रतिषत योगदान है। इन परिस्थितियों में वर्तमान कृशि कानून पर विस्तृत रूप से विचार विमर्ष करना आवष्यक हो गया। प्राचार्य डॉ. केएल टांडेकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस तरह समूह चर्चा का आयोजन करना न केवल अर्थषास्त्र विभाग के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह पठन-पाठन की तकनीक का एक रूप है। जिससे छात्र-छात्राएं बड़ी आसानी से विशय पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकते है। समूह चर्चा के विशय पर मंथन करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. आरआर कोचे ने बताया कि भारत सरकार ने तीन नए कृशि कानून को पारित कराता है। जिसमें कृशि उत्पादन, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन, सुविधा विधेयक) के साथ मूल्य आष्वासन व कृशि सेवाओं पर कृशक सषक्तिकरण व संरक्षक अनुबंध विधेयक के अतिरिक्त आवष्यक वस्तु अधिनियम संषोधन बिल है। तीनो कानूनो के विधेयक के अंतर्गत किसानो को अपनी उपज विक्रय करने की आजादी होगी।
उपज देषभर में कही भी बेच सकेंगे- देषभर में कही भी किसान अपनी उपज ऑनलाइन मोड़ पर भी विक्रय कर सकते है। इसी प्रकार दूसरे बिल मंे कांटैªक्ट फार्मिंग अथवा अनुबंध खेती की खराब होने की दषा में क्षतिपूर्ति कंपनियों को देने का प्रावधान है। जबकि तीसरे कानून आवष्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत अब खाद्य तेल, तिलहन, दाल, प्याज और आलू जैसे उत्पादो से स्टॉक लिमिट लगाई जाएगी। इस महत्वपूर्ण विशय पर सभी विद्यार्थियों ने चर्चा मंे भाग लेकर अपनी राय रखी तथा कानून के विवादित बिंदु से आषांकित किसानों पर चिंता जताई गई।
किसानों को बिल पर यह आषंका- बिल से किसानो को आषंका है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नही है तथा राज्य सरकारो की चिंता है कि मंडियो का अस्तित्व नही होने से मंडी षुल्क से प्राप्त राजस्व में कमी होगीं। इसी प्रकार कांटैªक्ट फार्मिंग के अंतर्गत किसान और कंपनी के मध्य विवाद की स्थिति में विवाद का निपटारा केवल एसडीएम की अदालत में ही होगा। इसे उच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान नही है।
आवष्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ेगी- इस बिल के तीसरे कानून में विवादित बिंदु यह है कि अब आवष्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत खाद्य तेल, तिलहन, दाल, प्याज और आलू जैसे कृशि उत्पादों पर से स्टॉक लिमिट लगाई जाएगी। जबकि प्रोसेसर या वैल्यू चैन के लिए ऐसी कोई स्टॉक लिमिट नही होगी। कानून मंे इस प्रकार की व्यवस्था से आवष्यक वस्तुओं की कीमते बढ़ेगी।
फोटो डीजीजी 04 तीन कृृशि कानून को लेकर कॉलेज में व्याख्यान का किया गया आयोजन।

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