- महुआ संग्रहण करने वाली महिलाओं को वनप्रबन्धन समितियों द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण – बड़गैया
प्रकाश नाग/ केशकाल : केशकाल वन परिक्षेत्र अंतर्गत इको पर्यटन केंद्र टाटामारी क्षेत्र का लगभग 70 प्रतिशत भाग आग के हवाले हो गया है, गुरुवार की सुबह लगभग 11 बजे कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा इस क्षेत्र में आग लगा दी गई है, जिसके चलते घास व खरपतवार इस आग की चपेट में आ गए हैं गनीमत रही कि पेड़ों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची है। मौके पर रेंजर नरेश नाग भी पहुंच वन्य कर्मियों के द्वारा किसी प्रकार से आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग की टीम हर सम्भव प्रयास कर रही है। घंटो बाद आग पे बाकू पाया गया 2 दिन पूर्व भी केशकाल वनपरिक्षेत्र के जंगलों में 12 घण्टों तक आग लगा हुआ था उसे भी वनकर्मियों द्वारा बुझाया गया था ।
इन दिनों ग्रामीण क्षेत्र के लोग मउहा बीनने के लिए मउहा पेड़ के आस पास सूखे पत्तों में आग लगते है और उसे जलता हुआ ही छोड़ दिया जाता है। इसी के तहत गुरूवार की सुबह कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा केशकाल वन परिक्षेत्र अंतर्गत इको पर्यटन केंद्र टाटामारी क्षेत्र का लगभग 70-75 प्रतिशत भाग आग के हवाले कर दिया गया था, देखते ही देखते आग की की लपटें पूरे क्षेत्र में फैल गयी। आग की चपेट में आने से पूरे क्षेत्र का घास व खरपतवार जल कर राख हो गया है वहीं पेड़ों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची है। वहीं आग लगने की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तथा आग पर काबू पाने की कवायद शुरू की गई है।
इस विषय पर कांकेर सीसीएफ एसडी बड़गैया बताया कि महुआ का संग्रहण ग्रामीण करते है जिसके लिए ग्रामीण जंगलो में आगजनी की घटना अंजम देते हैं हमारे द्वारा पूरी कोशिश की जा रही है कि संयुक्त वनप्रबंधन के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ संग्रहण करता महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं और पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जंगलों में आग लगा कर ना छोड़े आज मैं केशकाल पर्यटन स्थल टाटामारी आया हुआ था यहाँ भी कुछ असामाजिक तत्व के लोगो द्वारा आग लगाया गया है जिसे हमारे कर्मचारियों के द्वारा आग पर काबू पाने का हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के चलते यहां दमकल विभाग का पहुंचना सम्भव नही है जिसके कारण वन्य कर्मचारियों के द्वारा किसी प्रकार से आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। जंगलों में आग न लगाने को लेकर ग्रामीणों को हमारे द्वारा लगातार समझाइश दी जाती रही है लेकिन कुछ उपद्रवी अपनी हरकतों से बाज नही आते। भविष्य में इस प्रकार से यदि कोई भी व्यक्ति जंगल मे आग लगते हुए पाया जाता है तो उस पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी

