दिलहरण चंद्रा/ जैजैपुर : जैजैपुर क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम पंचायत अरसिया मे धरमलाल चंद्रा के निवास मे भागवत साक्षात भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी का वांग्मय स्वरूप है , इसका दर्शन , स्पर्श , श्रवण और संकीर्तन मनुष्यों के लिए सदा कल्याणकारी ही है l यह सभी पुराणों का तिलक व सार भी है इसे तो पंचम वेद भी कहा है जो ज्ञान सरिता के रूप में प्रवाहित होती रही है l यह केवल पुरुषार्थ के बल पर ही नहीं बल्कि भाग्योदय होने पर ही मनुष्यों को प्राप्त होता है , देवताओं को नहीं l यह उद्गार ग्राम अर्शिया में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस व्यासपीठ से भागवत मर्मज्ञ आचार्य राजेंद्र महाराज ने प्रकट किया l श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ है भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कलश उठाया तथा ग्राम के मुख्य मार्गों से होते हुए ग्राम देवताओं एवं वरुण देवता की पूजा अर्चना किए l संकीर्तन एवं राधे राधे की जय कारा से ग्राम में धार्मिक वातावरण का उल्लास दिखाई दे रहा था । आचार्य ने बताया की श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ संसार का सबसे बड़ा सत्कर्म है जो भगवान श्री कृष्ण के स्व धाम गमन होने के 30 वर्ष पश्चात पहली बार इस धरा पर हुई , जिसके यजमान विष्णु रात राजा परीक्षित बने और यह कथा ब्रह्म रात सुखदेव जी महाराज के मुखारविंद से कहीं गई , आज ज्ञान सरिता के रूप में पूरे विश्व का कल्याण करने प्रवाहित हो रही है l भागवत कथा रस को मनसे पीना चाहिए , क्योंकि भागवत वेद रूपी कल्पवृक्ष पर एक लगा हुआ ऐसा सुंदर फल है जिसमें ना तो छिलका है ना गुठली अर्थात त्यागने के लिए कुछ भी नहीं है l इस अवसर पर परिमल सिंह नर्मदा बाई चंद्रा , दिलीप कुमार शकुंतला देवी , रामेश्वर प्रसाद अंजलि , रामकिशन फुलेश्वरी चंद्रा , श्रवण कुमार ममता , दिलेश्वर बालेश्वरी चंद्रा मीना चंद्रा , जय लक्ष्मी विजय चंद्रा , गोमती भाई एवं अनेक श्रोता उपस्थित थे lभागवत कथा यज्ञ में यज्ञ में उपाचार्य सौरभ मिश्रा , राजेश कुमार दुबे एवं शिवा दुबे द्वारा वेद मंत्र उच्चार के साथ पूजा अर्चना संपन्न कराई जा रही है l प्रसिद्ध भजन गायक संतोष कुमार के द्वारा संगीत में संकीर्तन व जीवंत झांकियों का लाभ श्रोताओं को प्राप्त हो रहा है l भागवत यज्ञ के आयोजक धरमलाल एवं ललिता बाई द्वारा अधिकाधिक संख्या में कथा श्रवण हेतु उपस्थित होने आग्रह किया गया है ।।
श्रीमद् भागवत कथा कलश यात्रा के साथ आरंभ किया आचार्य राजेंद्र महाराज

