- छेरछेरा कोठी के धान ला हेर हेरा आज दिनभर घरो घर जाकर मांगा गया धान
यामिनी चन्द्राकर/ छूरा: छतीसगढ़ प्रदेश में नए साल के शुरुवात का प्रथम त्यौहार गुरुवार को छूरा नगर सहित पूरे अंचल में छत्तीसगढ़ का लोकपर्व छेरछेरा धूमधाम के साथ मनाया गया । यह पर्व पौष पूर्णिमा के दिन खास तौर पर मनाया जाता है। यह अन्न दान का महापर्व है। छत्तीसगढ़ में यह पर्व नई फसल के खलिहान से घर आ जाने के बाद मनाया जाता है। यह उत्सव कृषि प्रधान संस्कृति में दानशीलता की परंपरा को याद दिलाता है। उत्सवधर्मिता से जुड़ा छत्तीसगढ़ का मानस लोकपर्व के माध्यम से सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए आदिकाल से संकल्पित रहा है। इस दौरान लोग घर-घर जाकर अन्न का दान मांगते हैं। वहीं गांव के युवक गाजे बाजे के साथ घर-घर जाकर डंडा नृत्य करते हैं। लोक परंपरा के अनुसार पौष महीने की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष छेरछेरा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सुबह से ही बच्चे, युवक व युवतियां हाथ में टोकरी, बोरी आदि लेकर घर-घर छेरछेरा मांगते हैं। वहीं युवकों की टोलियां डंडा नृत्य कर घर-घर पहुंचती हैं। धान मिंसाई हो जाने के चलते गांव में घर-घर धान का भंडार होता है, जिसके चलते लोग छेर छेरा मांगने वालों को धान दान करते हैं। इन्हें हर घर से धान, चावल व नकद राशि मिलती है। इस त्योहार के दिन ही डंडा नृत्य करने वाले लोग आसपास के गांवों में नृत्य करने जाते हैं। जहा उन्हें बड़ी मात्रा में धान व नगद रुपए मिल जाते हैं। इस त्योहार के दिन ग्रामीण इलाकों में कामकाज पूरी तरह बंद रहता है। इस दिन लोग प्रायः गांव छोड़कर बाहर नहीं जाते।

