- नए वर्ष में कांकेर मेला नहीं होने से लोगों में मायूसी ग्रामीण दुखी
अक्कू रिजवी/ कांकेर। कांकेर का ऐतिहासिक मेला जो 100 वर्षों से भी अधिक समय से लगातार चलता आ रहा है ,उसके नए वर्ष 2021 मैं नहीं होने की संभावना से न केवल व्यापारी बल्कि ग्रामीण तथा शहरी जनता भी दुखी है । कांकेर मेला न केवल साल का पहला त्यौहार जैसा संस्कृति उत्सव का माहौल बना देता था बल्कि दूरदराज के अनेक बिछड़े हुए साथियों तथा रिश्तेदारों का मिलन स्थल भी था जहां लोग साल में एक बार मिलकर अपने सुख दुख बांटा करते थे । बच्चों और महिलाओं के लिए तो मेला एक विशेष आकर्षण होता ही है, सयानी उम्र के लोगों के लिए भी हर मेला एक यादगार होता है जो इस वर्ष कोरोना के कारण धोखा दे रहा है। कांकेर के मेले के विषय में पुराने लोग बताते हैं कि यह रियासत काल से चला आ रहा है और 100 वर्ष से भी काफी अधिक समय से कांकेर मेला प्रसिद्ध है। रियासत समाप्त होने के बाद जब जनपद सभा की स्थापना हुई तब कांकेर मेले का प्रबंध जनपद सभा द्वारा किया जाने लगा। लगभग 40 वर्ष पूर्व जनपद सभा को भी शासन द्वारा विसर्जित कर दिया गया तबसे नगर पालिका परिषद मेले का इंतजाम प्रतिवर्ष नए साल के प्रथम रविवार से 4 दिनों के लिए करती है इसे कांकेर के लिए नए साल की शुभ शुरुआत भी माना जाता है जोकि अबकी वर्ष अर्थात 2021 में नहीं हो सकेगी। इसका कारण यह बताया जाता है कि कोरोना मे सोशल डिस्टेंस सबसे अधिक जरूरी होता है जो कि मेले की भीड़ में संभव नहीं है इसके अलावा मास्क पहनने की आदत अभी लोगों में नहीं बनी है अतः यदि बाहर से कोई संक्रमित व्यक्ति आता है तो मेले ठेले जैसी जगहों में सैकड़ों लोग उसके द्वारा संक्रमित किए जा सकते हैं। छोटे-छोटे मेलों में इतना भय नहीं होता इसलिए छोटे मेले कहीं नहीं हो रहे हैं ।कांकेर में भी तथा नजदीकी तहसील नरहरपुर में भी मात्र देवी देवता के पूजा पाठ एवं औपचारिकताओं का निभाव करने हेतु मात्र एक ही दिन कुछ घंटों का विशेष कार्यक्रम सामाजिक नेताओं, गायता तथा पुरोहितों द्वारा रीति रिवाज के अनुसार संपन्न कर दिया जाएगा।

