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जनपद पंचायत आर.ई.एस. का प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी फुल फ्लैश में कर रहा है अपने कार्यों का निर्वहन

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  • ● सीनियर अफसरों के रहते जूनियर को अनुविभागीय अधिकारी का प्रभार….? प्रशासन मौन…!!
  • ● विभाग में उससे कहीं सीनियर और अच्छे अधिकारी मौजूद हैं , जो अनुविभागीय अधिकारी का प्रभार लेने की योग्यता तथा क्षमता दोनों रखते हैं…!!

अक्कू रिजवी/ कांकेर : यह एक  सर्वमान्य सरकारी परंपरा है  कि  यदि  सरकार के किसी पद पर कार्य करने हेतु  कोई भी अफसर  उपलब्ध  ना हो तो उपलब्ध वरिष्ठ अधिकारी को प्रभार दिया जाता है और वह वरिष्ठ अफसर नए अफसर के आने और चार्ज ग्रहण करने तक अस्थायी रूप से प्रभारी अधिकारी का कार्य करता रहता है । नये अधिकारी के आने तक की अवधि सामान्य रूप से छोटी ही रहती है । लंबे समय तक प्रभारी अधिकारी किसी को बनाए नहीं रखा जा सकता क्योंकि वह पूरे अधिकारों सहित प्रभार नहीं ले सकता । इसीलिए पूर्ण अधिकार सहित कार्य करने वाले अधिकारी की प्रतीक्षा कुछ दिनों सप्ताहों या दो चार महीनों तक की जा सकती है लेकिन प्रभार में ही किसी का एक साल और एक माह बीत जाना असाधारण होता है । इससे अच्छा तो यही माना जाता है  कि प्रभारी अधिकारी  का ही प्रमोशन कर दिया जाए और उस पर उसी को रहने दिया जाए ताकि वह  पूर्ण अधिकार सहित अबाध रूप से  कार्य कर सकें । लेकिन कांकेर जिला प्रशासन में एक बहुत बड़ी अनियमितता देखने में आ रही है । वह यह है कि एक छोटे अधिकारी को अपने स्तर के हिसाब से बहुत बड़े अधिकारी के पद का प्रभार दे दिया गया है । यह प्रभार दो-चार दिनों के लिए होता तो उसे मजबूरी समझ कर स्वीकार किया जा सकता था लेकिन 1 साल और 1 महीने हो जाने के बाद भी छोटा अफसर अपने कर्तव्यों के साथ साथ बड़े अफसर की कुर्सी पर भी जमकर चिपका हुआ है । सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि सारे नियम परंपरा कानूनों को ताक पर रखकर एक छोटे तथा कम योग्यता रखने वाले अधिकारी को लाभान्वित किया जा रहा है? जबकि विभाग में उससे कहीं सीनियर और अच्छे अधिकारी मौजूद हैं , जो अनुविभागीय अधिकारी का प्रभार लेने की योग्यता तथा क्षमता दोनों रखते हैं , फिर भी प्रशासन द्वारा उन सीनियर अफसरों की उपेक्षा करते हुए एक जूनियर को प्रभार थमा देना , वह भी अनिश्चित काल के लिए कहां तक उचित है..? यह आम जनता की समझ के परे है । मामला ग्रामीण यांत्रिकी सेवा  जनपद पंचायत विभाग का है , जहां के उप अभियंता विकास कुमार श्रीवास्तव को गत वर्ष 19 नवंबर 2019 को तत्कालीन कलेक्टर के हस्ताक्षर से कांकेर अनुविभाग के अनुविभागीय अधिकारी अर्थात एसडीओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है । उनके आदेश पत्र में लिखा हुआ है कि आगामी आदेश पर्यंत विकास श्रीवास्तव अनुविभागीय अधिकारी के चार्ज में रहेंगे और वह आगामी आदेश आज तक जारी नहीं हुआ है तथा श्रीवास्तव साहब 13 महीनों से एसडीओ की कुर्सी पर अकड़ कर बैठे हुए हैं। प्रशासनिक क्षेत्रों में इसे एक अच्छी परंपरा नहीं माना जाता । यदि किसी छोटे अधिकारी को प्रभार दिया जाए तो वह जल्द से जल्द समाप्त किया जा कर पूर्ण अधिकार वाले अधिकारी को सौंपा  जाना अति आवश्यक होता है लेकिन यहां तो 13 महीने बाद भी किसी अधिकार संपन्न अनुविभागीय अधिकारी को आदेश नहीं मिला है कि वह जाकर विकास श्रीवास्तव का प्रभार समाप्त करें और पूर्ण रूप से कार्यभार ग्रहण करें। ज्ञातव्य है कि प्रशासन के पास श्रीवास्तव से कहीं अधिक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं लेकिन उन्हें दरकिनार कर अज्ञात कारणों से श्रीवास्तव को ही एसडीओ बनाए रखा जा रहा है जो न केवल गलत परंपरा है बल्कि अनेक संदेहो  को भी जन्म देती है। इस संबंध में कुछ दिनों पूर्व इस लोकप्रिय समाचार पत्र में भी संवाद प्रकाशित हो चुका है किंतु फिर भी प्रदेश के उच्च अधिकारियों द्वारा मौन धारण किया जाना रहस्यमय ही कहा जाएगा,,,। प्रशासन के उच्च अधिकारियों को चाहिए कि शीघ्र अति शीघ्र कांकेर के एसडीओ का अतिरिक्त प्रभार विकास श्रीवास्तव से लेकर किसी पूर्ण अधिकार प्राप्त अधिकारी को प्रदान करें ताकि क्षेत्र में विकास की गंगा सही ढंग से बह सके..!!!

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