अक्कू रिजवी/ कांकेर : शहर में भालू परिवार के आतंक के विषय में इस लोकप्रिय समाचार पत्र में पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका है। खेद का विषय है कि सरकार द्वारा उचित ध्यान न देने के कारण समस्या पहले से भी अधिक जटिल हो चुकी है । रात में कभी कभी आने वाले भालू अब दिन में ही कांकेर शहर की मध्यवर्ती बस्ती में भी पहुंचने लगे हैं। आज सुबह 9:00 बजे के आसपास जय हिंद होटल के मालिक के सुभाष वार्ड स्थित भवन के आसपास भालू देखकर लोग बुरी तरह घबरा गए। बाद में भालू वहां से विद्युत विभाग के कार्यालय में पहुंच गया जो शहर के एकदम मध्य में है ।इस प्रतिनिधि ने कांकेर के वन मंडल अधिकारी महोदय से सीधे बातचीत की और बताया कि परसों भी रात में 10:00 बजे ही भालू का धावा मध्यवर्ती मोहल्ले माझा पारा में हुआ था, जिसमें रात में क्रिकेट खेल रहे बच्चे किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग गए थे। भालू मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी के मकान के बिल्कुल पास पहुंच चुका था, साथ ही उसने मेन रोड में भी चहल कदमी, उछलकूद करते हुए आतंक मचाया, अब भालू परिवार की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि दिन में भी निकलने लगे हैं । डीएफओ अरविंद महोदय ने हमारे प्रतिनिधि से कहा कि वन विभाग भालू के लिए पानी तथा फलदार वृक्षों को लगाने की योजना पर कार्य कर रहा है। हमारे प्रतिनिधि ने कहा कि आप लोग पहले भी जामवंत परियोजना के नाम से भालू के लिए भोजन पानी का प्रबंध कर रहे थे ,उस योजना का क्या हुआ? डी एफ ओ साहब ने बताया कि उस योजना को आगे बढ़ा रहे हैं लेकिन मुश्किल यह आ रही है कि एक तो कांकेर पहाड़ तथा जंगलों से घिरा हुआ है । दूसरी बात यह है कि यहां का कचरा प्रबंधन ठीक नहीं है। लोग घरों का कचरा और खाने की जूठन कहीं भी फेंक देते हैं और भालू उन्हें ढूंढते हुए पेट की आग बुझाने के लिए वहां पहुंचता है । हम लोग जितना कर सकते हैं करेंगे, लेकिन कचरा प्रबंधन भी तो सही होना चाहिए। भालू को तो भोजन चाहिए और लोगों द्वारा या होटलों द्वारा जब तक जूठन बाहर फेंका जाता रहेगा, तब तक भालू भी आता रहेगा।
कांकेर में दिनदहाड़े भालूओं के आने से शहर में मचा हड़कंप

