वॉच ब्यूरो/ जैजैपुर : विकासखण्ड के सीमा पर बोराई नदी में बनी करोडों की लागत से एनीकट जिसकी तकनीकी स्वीकृति 6 करोड़ 34 लाख 4 हजार रुपये और प्रशासकीय स्वीकृति 6 करोड़ 19 लाख नौ हजार रुपये है आज भ्रष्टाचार के आंसू रो रहा है । गौरतलब है कि जल संसाधन विभाग की ओर से बना यह एनिकट वास्तव में जैजैपुर क्षेत्र के ग्राम करौवाडीह के बीच वहती बोराई नदी में बना हुआ है जिसे लगभग करोड़ों की लागत से बनाया गया है । ग्रामीणों की माने तो जब ये एनिकट निर्माण हो रहा था उसी समय इसके निर्माण कार्य में लापरवाही की आवाज बुलंद कुछ लोगों ने की थी लेकिन तत्कालीन इंजीनियर और ठेकेदारों के सामने उनकी एक न चली और उन्होंने जैसे- तैसे एनीकट का निर्माण किया ।
एनीकट निर्माण होते ही रिसने लगा पानी
यूं तो नाम के लिए एनिकट बन भी गया और निर्माण कराने वाले ठेकेदार बीबी वर्मा अपना बोरिया बिस्तर बांध कर अपनी जगह वापस चले भी गए लेकिन इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ा क्योंकि एनीकट का निर्माण पानी को सहेजने के लिए कराया गया था जिससे कि उस पानी से क्षेत्र के सिंचाई व्यवस्था भी सुचारू हो सके और पंजीकृत उद्योग धंधे भी संचालित हो सके लेकिन इसके विपरीत इस एनीकट से पानी ऐसे बहने लगी जैसे की वह फूट – फूट कर रो रहा हो । क्योंकि इस एनीकट में यत्र तत्र सर्वत्र सिर्फ दरारें ही दरारें देखने को मिल रही है जिससे पानी रुकने का मतलब ही नहीं होता , भला हो कि नहर में पानी छोड़ा गया जो इस एनीकट के पास आकर मिलता है जिससे अभी क्षेत्र के लोगों के नहाने – धोने का काम अभी के सीजन में चल रहा है नहीं तो एनीकट के भरोसे तो सिर्फ और सिर्फ धोखा ही इन ग्रामीणों को मिलता।
एस्टीमेट में गैट और लगे सिर्फ 14
यहां भ्रष्टाचार की एक और बानगी देखने को मिली इस एनीकट में लगे हुए गेट की संख्या में ग्रामीणों ने बताया कि 15 जल द्वारा के निर्माण की बात की गई थी जो कि संबंधित सूचना पटल बोर्ड में भी अकित है जबकि वास्तविक में 15 जलद्वार निर्मित हुआ ही नहीं है जिससे कि पता चलता है कि जल संसाधन विभाग भी भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी अन्य विभाग से बिल्कुल भी पीछे नहीं है । अब इसमें दोषी ठेकेदार है या पेटी ठेकेदार है या इंजीनियर है या फिर ईई यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा ।

