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पर्यटन ग्राम में संचालित रेस्टोरेंट पर फिर मंडराने लगे संकट के बादल

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स्वपनिल तिवारी/ पिथौरा : समीप के बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र की वन समितियों द्वारा संचालित पर्यटन ग्राम में संचालित रेस्टोरेंट पर एक बार फिर से संकट के बादल मंडराने लगे है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बार सत्ता पक्ष के एक बड़े नेता ने स्थानीय समितियों को दरकिनार करते हुए उच्च स्तर पर पर्यटक ग्राम में संचालित रेस्टोरेंट का टेंडर आयोजित किया है,ज्ञात हो कि इसके पूर्व भी बाहरी ठेकेदारों को उक्त रेस्टोरेंट देने का प्रयाश किया जा चुका है।परन्तु रेस्टोरेंट की आड़ में असामाजिक तत्वों के अभ्यारण्य में प्रवेश की सम्भावनाओ को देखते हुए नियमानुसार स्थानीय बार वन समिति को ही रेस्टोरेंट संचालन की जिम्मेदारी दी गयी थी।
छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक बार नयापारा एक बार पुनः चर्चा में है।इसके पूर्व बार के पर्यटक ग्राम में विभागीय अव्यवस्था चर्चा में थी।जिसके बाद वन मंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद सारी व्यवस्थाएं सुधार ली गयी थी।परन्तु अब एक नवम्बर से प्रारंभ होने जा रहा बार अभ्यारण्य इस बार राजनीति के चक्कर मे चर्चित हो रहा है।इस सम्बंध में ग्रामीणों का मानना है कि क्षेत्र के एक जन प्रतिनिधि अपने करीबी को रेस्टोरेंट दिलाने के प्रयास में टेंडर आयोजित करवा रहे है।जिससे स्थानीय लोगो का रोजगार छीन जाएगा और वर्तमान कोरोना काल मे स्थानीय लोगों को पुनः पलायन करना पड़ेगा।
।।सब स्थानीय,,, कैवर्त्य
इधर बार वन समिति के अध्यक्ष सियाराम कैवर्त्य ने इस प्रतिनिधि को बताया कि शासन की स्थानीय कार्यो में स्थानीय लोगो को रोजगार देने की मंशा पर स्वयम सत्ता पक्ष ही रोड़े लगा रहा है।यहां स्थानीय लोग ही रेस्टोरेंट चला रहे है।इसमें रसोइए,वेटर रिसेप्शनिस्ट से लेकर सभी कर्मचारी स्थानीय है।जिन्हें रेस्टोरेंट में आय के अनुसार हिस्सा दिया जाता है।जिससे क्षेत्र के सैकड़ा भर परिवारों की आजीविका चल रही है।यह बात पता रहते हुए भी इसे अपने करीबी लोगों को लाभ पहुचाने की नीयत से ही उच्च जनप्रतिनिधियों द्वारा इसे स्थानीय समिति से छीनना चाहते है।जिसे किसी भी हालत में बर्दास्त नही किया जाएगा।
    ।।कोरोना काल,,तालाब भी दिए।।
 सूत्र बताते है कि कोरोना संक्रमण में अस्त व्यस्त व्यवस्था को पटरी पर लाने शासन प्रशासन भरसक प्रयास कर रहा है।वह क्षेत्र के मजदूरो के पलायन को रोकने के लिए इस वर्ष वन क्षेत्र के तालाबो में मछली पालन हेतु इसे वन समितियों को दिया गया है।वही दूसरी ओर शासन के ही प्रतिनिधि वन समितियों के रोजगार छिनने के प्रयास में लगे है ।जो कि क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है।
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