तिलकराम मंडावी/ डोंगरगढ़ : आदर्श नागसेन बोद्ध विहार में आज धम्मचक्र परवर्तन दिवस पर सुबह धर्म गुरु भंते नागरत्न भंते कुमार कश्यप के द्वारा बुद्ध समाज के अनुयायियों की उपस्थिति में बुद्ध वंदना कर मनाया गया तहसील परिसर में स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जयघोष के नारे लगाए जिसके बाद दीप प्रज्वलित कर बुद्ध वंदना किया गया इस अवसर पर बुद्ध विहार में बोद्ध समाज के अध्यक्ष मुनालाल नंदेश्वर नगरपालिका अध्यक्ष सुदेश मेश्राम सिद्धार्थ नागदेवे नलिनी मेश्राम संगीता रंगारी योगेश बोरकर सहित समाज के अन्य वक्ताओं ने संविधान निर्माता डॉ भीमराव आम्बेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार व्यक्त करते हुए कहां गया कि भारतीय बौद्धों का एक प्रमुख उत्सव है दुनिया भर से लाखों बौद्ध अनुयाई इकट्ठा होकर हर साल अशोक विज्यादशमी एवं 14 अक्टूम्बर के दिन इसे मुख्य रूप से दीक्षाभूमि नागपुर एवं सम्पूर्ण भारत मे इस उत्सव को स्थानीय स्तर पर भी मनाया जाता है।20वी सदी के मध्य में डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने अशोक विजयादशमी के दिन 14 अक्टूम्बर को नागपुर में अपने 500,000 अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने जहां बौद्ध धर्म की दीक्षा ली वह भूमि आज दीक्षा भूमि के नाम से जानी जाती है डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने जब बौद्ध धर्म अपनाया था तब बुद्धाब्ध बौद्ध वर्ष 2500 था। विश्व के कई देशो एवं भारत के हर राज्य से बौद्ध अनुयाई हर साल दीक्षाभूमि नागपुर आकर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस 14 अक्टूम्बर को एक उत्सव के रूप में मनाते है डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने यह दिन बौद्ध धम्म दीक्षा के लिए चुना,क्योकि इसी दिन ईसा पूर्व 3री सदी में सम्राट अशोक ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया था तब से यह दिवस बौद्ध इतिहास में अशोक विजयादशमी के रूप में मनाया जाने लगा था, डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने बीसवीं सदी में बौद्ध धर्म अपनाकर भारत मे लुप्त हुये बौद्ध धर्म का पुनरुथान किया धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के अवसर पर दीक्षा भूमि में प्रतिवर्ष हजारो लोग धर्म परिवर्तन कर स्वेच्छा से बौद्ध बनते है, अनुयायियों ने दीक्षाभूमि पर बौद्ध धर्म अपनाया था बौद्ध समाज के जो आज कायक्रम आयोजित किया जिसमें शासन के नियमों का मुख्य रूप से पालन किया गया इस अवसर पर अनिल सहारे लक्ष्मण अंबा दे राजकुमार नंदेश्वर गरीब गड़पायले मिलिंद मेश्राम किरण देउडकर MkW- jkts’k jkmrdj दीपक साखरे टीकाराम अमन जनबन्धु प्रजेश सहारे विलास सहारे वाल्दे हरविंदर कुमार आजाद गौरव टेम्भूरकर सुभाष भास्कर मयूर हथेल सहित आदि बौद्ध समाज के अनुयायी उपस्थित थे

