- स्कूली बच्चे मछली पकड़ने व मोबाईल गेम खेलने में व्यस्त
कमलेश रजक /मुंडा : कोरोनावायरस संक्रमण जैसी महामारी के करण स्कूल बंद है। स्कूल बंद होने से बच्चे इधर-उधर घूम रहे हैं जिससे इन दिनों माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है। जो बच्चे आगे चलकर अपना और अपने साथ-साथ परिवार, समाज को आगे बढ़ाने और एक बेहतर जीवन शैली का निर्माण करने में सहायक होते है उनकी ही आज स्थिति बिल्कुल विपरीत है। बहुत बड़ी विडंबना उसके भविष्य को संवारने वाले बच्चे हो गए है। कोरोना महामारी के चलते शिक्षा व्यवस्था को आॅनलाइन कर दी गई है, वहां इस आॅनलाइन पढ़ाई से अधिकांश बच्चे कोसो दूर है। बच्चे आज अपना समय मछली पकड़ने, मोबाईल गेम खेलने, बांटी खेलने, कब्बडी खेलने और खाली समय में इधर-उधर घूमने में व्यतीत कर रहे है। लाॅकडाउन के चलते स्कूल-काॅलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थानों में आॅनलाइन कक्षाएं चल रही है। वही बच्चों को आॅनलाइन होमवर्क दिया जा रहा है। शिक्षक भी वाॅट्सअप व एप्लीकेशन के जरिए बच्चों को पढ़ा रहे है। पालको की माने तो फिजिकल क्लास रूप व आॅनलाइन क्लास में बहुत अंतर है, क्योंकि इसमें कई खामियां धीरे-धीरे निकल कर आ रही है। बच्चों को जो सिलेबस पढ़ाया जा रहा है, वह समझ में कम आ रहा है। इसमें नुकसान पढ़ाई का है, क्योंकि आॅनलाइन क्लासेस से बच्चें पर बोझ पड़ने के साथ परेशानी भी बढ़ी है। इससे बच्चे कम्प्यूटर, लैपटाॅप और मोबाईल स्क्रीन पर ज्यादा समय दे रहे है। इससे आंखो पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

