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पूण्यतिथि पर याद किए गए कला-मनीषि मंदराजी दाऊ

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  • लोक कलाकारों एवं साहित्यधर्मियों ने दी कृतज्ञतापूर्ण श्रध्दांजलि

राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ी लोकरंग शैली नाचा के पुरोधा-पुरूष दाऊ दुलारसिंग मंदराजी को उनके 36वीं पूण्यतिथि पर लोक कलाकारों व साहित्यधर्मियों ने कृतज्ञतापूर्वक याद करते हुए  उन्हें सादर श्रध्दांजलि अर्पित कीं। लोक गायक महादेव हिरवानी ने कवि/साहित्यकार व लोक संगीतकार आत्माराम कोशा ‘अमात्य‘ द्वारा रचित व संगीतबध्द गीत- बबा..मंदराजी, लोककला नाचा के सियान गा….गाकर श्रध्दांजलि अर्पित किया वहीं अन्य कलाकारों ने शस्तरिहा भजन गाकर दाऊ जी को सांगीतिक श्रध्दांजलि दी।  स्वर्गीय दाऊ जी की कर्मभूमि ग्राम कन्हारपुरी वार्ड नं. 34 मेें आयोजित श्रध्दांजलि सांगीतिक सभा में नाचा के सुप्रसिध्द कलाकार व हार्माेनियम वादक लोक गायक महादेव हिरवानी प्रतिष्ठित नागरिक श्यामलाल बजरंग, तबलावादक दिनेश साहू व अन्य कलाकारों ने दाऊ जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर उनके नाचा विधा एवं सांगीतिक बैठकी के क्षेत्र में दिए गए अनुदान को कृतज्ञतापूर्ण याद किया और उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि दाऊ जी एक महान कलाकार थे उनका सानिध्य लाभ पाकर लोक संगीत के क्षेत्र में सुप्रसिध्द संगीतकार खुमानलाल साव (चंदैनी गोंदा) सत्यमूर्ति देवांगन, (सोनहा बिहान) व देवीलाल नाग (न्यू थिएटर-दिल्ली) जैन बडे-बडे कलाकार हुये जिनकी बनाई कर्णप्रिय धुने आज भी लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए है। दाऊ चतुरसिंग ने बताया कि लोक संगीतधर्मी आत्माराम कोशा अमात्य दाऊ जी के साथ लखोली रवेली नाचा पार्टी से लेकर नवा गोंदा व नामी चोर चरणदास पार्टी- टेडेसरा से सानिध्य लाभ पाकर अपने जमाने के श्रेष्ठ बेंजो वादक साबित हुए व लोक संगीतकार के रूप में भी अपनी प्रतिष्ठा बनाए हुए है। वार्ड के प्रतिष्ठित नागरिक श्यामलाल बजरंग ने बताया कि दाऊ जी का जन्म हालांकि निकटतस्थ ग्राम रवेली में हुआ लेकिन उनकी शिक्षा दीक्षा कन्हारपुरी में हुई। वे यहां के तुलसी कारीगर के पिताजी से चिकारावादन सीखा तथा वाद में हार्माेनियम पर अपने जौहर दिखाए। दाऊ जी कन्हारपुरी में रहकर ऐसे-ऐसे कलावीजो का रोपण किया जो आज भी कला के क्षेत्र में नाम कमा रहे है। स्व. बृजलाल मास्टर इंदरमन, दाऊ टहलसिंग, उकिल हिरवानी, चतुर सिंग, छन्नूलाल, नत्थन, खोरबाहरा के अलावा वर्तमान पीढी में लोक गायक महादेव हिरवानी महेन्द्र रजक गोदावरी, मनहरण साहू, दिनेश साहू जैसे कलाकारों का नाम प्रमुख है। श्रध्दांजलि सभा में उपस्थित लोक कलाकारों ने कहा कि प्रदेश सरकार हर साल मंदराजी दाऊ जी के  नाम पर 2 लाख रूपये का पुरस्कार प्रदान करती है। नाचा रंग-विद्या के क्षेत्र में उनका गुणगान किया जाता है लेकिन कला के पुजारी दाऊ जी के नाम पर आज तक कहीं चैक-चैराहा व स्कूल भवन का नहीं रखा गया है। इसका उन्हें मलाल है। कलाकारों ने कहा दाऊ के नाचा की प्रसिध्दी न केवल रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह के दरबार तक थी बल्कि जमशेदपुर, टाटा नगर सहित छत्तीसगढ़ से लगे आस-पास के प्रांतों में भी थी जिसकी धूम हुआ करती थी। 24 सितंबर को दाऊ जी की जयंती के संदर्भ में अखबार फेसबुक व वाट्सअप में प्रसारित सामग्री को पढकर सुप्रसिध्द ढोलक वादक मदन शर्मा, डाॅ. संतराम देशमुख विमल, शिवकांत तिवारी दुर्ग के अलावा साहित्यकार आचार्य सरोज द्विवेदी, गिरीश ठक्कर, डाॅ. दादूलाल जोशी, पद्मलोचन शर्मा, राजकुमार चैधरी, ओम प्रकाश साहू, ग्वाला प्रसाद नटखट, पवन यादव पहुना, गोंविद साव, रोशन साहू आदि लोककला साहित्यधर्मियों में स्व. दाऊजी को श्रध्दांजलि दी और कहा कि मंदराजी दाऊ जी के नाचा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उक्त जानकारी लोक गायक महादेव हिरवानी ने दी।

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